A2Z सभी खबर सभी जिले की

संयुक्त ज्ञापन: 1997-2011 के शिक्षकों को TET से छूट देने की मांग तेज, संगठनों ने उठाई आवाज

संयुक्त ज्ञापन: 1997-2011 के शिक्षकों को TET से छूट देने की मांग तेज, संगठनों ने उठाई आवाज

संवाददाता धनंजय जोशी

जिला पांढुरना मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ एवं मध्य प्रदेश राज्य शिक्षक संघ के संयुक्त तत्वावधान में आज एक महत्वपूर्ण ज्ञापन कलेक्टर पांढुर्णा के माध्यम से देश एवं प्रदेश के उच्च पदस्थ जनप्रतिनिधियों को सौंपा गया। ज्ञापन में वर्ष 1997-98 से 2011 के बीच नियुक्त शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) से पूर्णतः छूट देने की मांग प्रमुख रूप से उठाई गई।
ज्ञापन में संगठनों ने स्पष्ट किया कि उक्त अवधि में नियुक्त शिक्षक पिछले 15 से 25 वर्षों से निरंतर शिक्षा व्यवस्था में अपनी सेवाएं दे रहे हैं और उन्होंने व्यापक अनुभव अर्जित किया है। ऐसे में अब उन्हें TET परीक्षा के दायरे में लाना न केवल अव्यावहारिक है, बल्कि उनके साथ अन्याय भी है।


संयुक्त संगठनों द्वारा प्रस्तुत मुख्य तर्क इस प्रकार हैं—
दीर्घकालीन अनुभव: 1997-98 से 2011 तक नियुक्त शिक्षक वर्षों से शिक्षण कार्य कर रहे हैं, ऐसे में उनके अनुभव को देखते हुए TET की अनिवार्यता समाप्त की जानी चाहिए।
नीतिगत विसंगति: TET परीक्षा वर्ष 2009 के बाद लागू हुई, इसलिए पूर्व में नियुक्त शिक्षकों पर इसे लागू करना तर्कसंगत नहीं है।
शैक्षणिक योग्यता पूर्ण: नियुक्ति के समय शिक्षकों ने निर्धारित योग्यता (D.Ed./B.Ed.) पूर्ण की थी और वर्षों का अनुभव भी प्राप्त किया है।

Related Articles


सेवा लाभों पर असर: TET की अनिवार्यता के चलते शिक्षकों के प्रमोशन, वेतन वृद्धि और अन्य सुविधाएं प्रभावित हो रही हैं, जिससे असंतोष की स्थिति बन रही है।
संयुक्त संगठनों ने मांग की है कि वर्ष 1997-98 से 2011 तक नियुक्त सभी शिक्षकों को TET (शिक्षक पात्रता परीक्षा) से छूट प्रदान की जाए, ताकि उनके साथ न्याय हो सके और शिक्षा व्यवस्था प्रभावित न हो।
इस दौरान ज्ञापन सौंपने वालों में प्रमुख रूप से रामगोपाल भॉयर, शत्रुघ्न मस्तकर, उमेश बिनजादे, चंद्रशेखर इंगले, सुनील यावले, संजय डाबरे, रविन्द्र कोहले, मधुकर चौधरी, सालबर्ड, संजय आसरे, शशिकांत बोकड़े, शेषराव रेवतकर एवं संजय बांबल सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।
अंत में संगठनों ने सरकार से इस विषय पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की है, ताकि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों को राहत मिल सके।

Show More
Back to top button
error: Content is protected !!