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हमीरपुर:कठोर कार्यवाही नहीं होने से शिक्षा के मंदिर हो रहे बदनाम 

रिपोर्टर राजकुमार हमीरपुर अखंड भारत 

मौदहा हमीरपुर। विकास खण्ड क्षेत्र में शिक्षकों द्वारा की जा रही लेटलतीफी, लापरवाही का खामियाजा सिर्फ बच्चे ही नहीं भुगत रहे बल्कि विरोध करने पर शिक्षकों द्वारा सरकारी काम में बाधा डालने की शिकायतें कर बच्चों के अभिभावकों को भी झूठे मामले में फंसाने के मामले सामने आते रहते हैं लेकिन अध्यापकों पर विभागीय कार्यवाही नहीं होने के चलते क्षेत्र के शिक्षा के मंदिरो के लगातार बदनाम होने का सिलसिला जारी है जबकि खण्ड शिक्षा अधिकारी ने जांच के बाद कार्यवाही की बात कही है।

कोतवाली क्षेत्र के सिजनौडा, पढोरी, भैंसता के बाद सोमवार को सिलौली के स्कूल में तैनात अध्यापकों पर ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाते हुए सैकड़ो ग्रामीण स्कूल पहुंच गए इस दौरान शिक्षकों और अभिभावकों में तीखी झडप भी हुई।

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कोतवाली क्षेत्र के ग्राम सिलौली स्थित स्कूल में तैनात शिक्षकों रामलखन सोनी,राजकुमार गुप्ता और हरिमोहन गुप्ता पर सैकड़ो ग्रामीणों ने शिक्षण कार्य में रुचि नहीं लेने, बच्चों को जातिसूचक शब्द बोलने, स्कूल में घ्रूमपान करने और अपनी गाडियां धुलवाने सहित मिडडे मील भोजन घटिया परोसने जैसे गंभीर आरोप लगाते हुए स्कूल पहुंच गया जहां ग्राम प्रधान सहित ग्रामीणों और अध्यापकों में तीखी नोकझोंक भी हुई जिसके वीडियो भी सोशल मीडिया में जमकर वायरल हो रहे हैं ग्रामीणों ने तीनो अध्यापकों के ट्रांसफर और विभागीय कार्यवाही की मांग की है। जबकि खण्ड शिक्षा अधिकारी सुशील कुमार कमल ने मामले की जांच के बाद नोटिस जारी करने और विभागीय कार्यवाही करने की बात कही है।

बताते चलें कि, ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलों में तैनात अध्यापक लेटलतीफी करते हैं और यदि को अभिभावक या ग्रामीण मामले की शिकायत दर्ज कराता है या विरोध करता है तो उनके द्वारा सरकारी काम में बाधा डालने की झूठी शिकायत दर्ज करा उसे परेशान करने काम किया जाता है इतना ही नहीं यदि सम्बंधित अध्यापक महिला है तो शिकायत कर्ता के विरुद्ध सरकारी काम में बाधा डालने के साथ ही अभद्रता, अश्लीलता और छेडछाड जैसे हथियार भी अपनाए जाते हैं।

यहां सबसे सोचनीय बात यह है कि समाज को शिक्षित करने का बीडा उठाने वाले शिक्षक ही शिक्षा के मंदिरो को बदनाम कर रहे हैं इसकी मुख्य वजह ऐसे शिक्षकों पर कठोर विभागीय कार्यवाही नहीं होना भी है। जबतक ऐसे शिक्षकों पर कठोर कार्यवाही नहीं होती तब तक शिक्षा के मंदिर ऐसे ही बदनाम होते रहेंगे।

 

 

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