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आधार निर्माण के नाम पर चल रहे एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा

सॉफ्टवेयर क्लोनिंग से सुरक्षा को बड़ा खतरा


जहानाबाद। जिले के मखदुमपुर स्थित बैंक ऑफ इंडिया शाखा परिसर में आधार निर्माण के नाम पर चल रहे एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। एक अनधिकृत कर्मी अधिकृत एजेंसी की आड़ में अवैध तरीके से यह गोरखधंधा चला रहा था।
बैंक परिसर स्थित आधार केंद्र पर एक कर्मी की संदिग्ध गतिविधियों को देखकर भास्कर रिपोर्टर ने उस पर नजर रखनी शुरू की। संदेह होने पर जब रिपोर्टर ने उसे कंप्यूटर री-लॉग इन करने को कहा, तो वह भड़क गया और खुद को जज का भाई बताकर धमकाने लगा।

मामला बढ़ने पर शाखा प्रबंधक राजेश कुमार को इसकी सूचना दी। प्रबंधक ने ऑपरेटर को अपने चैंबर में बुलाकर सिस्टम री-लॉग इन करने को कहा। दबाव पड़ने पर आरोपी ने स्वीकार किया कि वह किसी अन्य की वैध आईडी का क्लोन बनाकर अवैध रूप से सिस्टम चला रहा था। सच्चाई सामने आते ही वह मौके से फरार हो गया।

मामले की भनक लगते ही शाखा प्रबंधक ने तुरंत एक्शन लेते हुए संबंधित कंप्यूटर सिस्टम को अपने कब्जे में ले लिया। साथ ही, इसकी सूचना संबंधित एजेंसी ‘पेय इन सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड’ और बैंक के ऊपरी प्रबंधन को दे दी गई है। शाखा प्रबंधक राजेश कुमार ने बताया कि उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं थी कि उनके परिसर में इस तरह का गोरखधंधे चल रहा है। वे बैंक के अन्य कार्यों में व्यस्त रहते हैं। उन्हें भास्कर रिपोर्टर के माध्यम से ही इस फर्जीवाड़े की भनक लगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि बैंक प्रबंधन इस मामले की हर पहलू से बारीकी से जांच कर रहा है। एजेंसी के मुख्य संचालनकर्ता को तलब किया गया है और जरूरत पड़ने पर दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

जानकारों के अनुसार, आधार कार्ड निर्माण प्रक्रिया बेहद संवेदनशील होती है। सरकारी संस्थाओं से करार के तहत अधिकृत एजेंसी और उसके संचालक को वैध आईडी व बायोमेट्रिक (फिंगरप्रिंट) ऑथेंटिकेशन दिया जाता है, ताकि इसका दुरुपयोग न हो। इसके साथ ही, लोकेशन मैपिंग का प्रावधान होता है ताकि तय स्थान के अलावा अन्यत्र काम न किया जा सके। लेकिन जब आधार निर्माण सॉफ्टवेयर या फिंगरप्रिंट की क्लोनिंग जैसी घटनाएं सामने आती हैं, तो यह सुरक्षा के लिहाज से बेहद चिंताजनक है। ऐसी जालसाजी का इस्तेमाल न केवल आम नागरिकों को आर्थिक नुकसान पहुंचाने के लिए, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ भी किया जा सकता है। फिलहाल, बैंक प्रबंधन की त्वरित कार्रवाई से एक बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हो चुका है और आगे की जांच जारी है।

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