
राजस्व प्रकरणों के त्वरित निराकरण के लिए सख्त निर्देश, सीमांकन व नामांतरण पर विशेष फोकस कलेक्टर श्री नीरज कुमार वशिष्ठ की सक्रिय पहल-नियमित समीक्षा, फील्ड निरीक्षण और जवाबदेही तय
संवाददाता धनंजय जोशी
जिला पांढुरना मध्य प्रदेश
जिले में राजस्व कार्यों की प्रगति की समीक्षा के लिए आयोजित महत्वपूर्ण बैठक कलेक्टर श्री नीरज कुमार वशिष्ठ की अध्यक्षता में कलेक्टर कार्यालय के सभाकक्ष में संपन्न हुई। बैठक में लंबित राजस्व प्रकरणों के शीघ्र एवं प्रभावी निराकरण, सीमांकन कार्यों में तेजी लाने तथा नामांतरण एवं बटवारा प्रकरणों को प्राथमिकता के साथ निपटाने के स्पष्ट निर्देश दिए गए।
कलेक्टर श्री वशिष्ठ ने कहा कि पांढुर्णा छोटा जिला होने के कारण यहां राजस्व प्रकरणों का त्वरित निराकरण संभव है, इसलिए सभी अधिकारी प्राथमिकता के आधार पर लंबित मामलों को शीघ्र समाप्त करें। उन्होंने स्वामित्व योजना के अंतर्गत लंबित प्रकरणों को जल्द से जल्द क्लोज करने के निर्देश दिए तथा आरसीएमएस पोर्टल पर सभी लंबित प्रकरणों की ऑर्डर शीट अनिवार्य रूप से अपलोड करने की बात कही।

प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता और समन्वय बनाए रखने के लिए कलेक्टर श्री वशिष्ठ ने प्रत्येक सोमवार को नियमित समीक्षा बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए, जिससे सभी तहसीलदार एवं एसडीएम आपसी तालमेल के साथ कार्यों की प्रगति सुनिश्चित कर सकें।
बैठक में विशेष रूप से नांदनवाड़ी एवं तिगांव के लंबित स्वामित्व प्रकरणों को इसी माह में निराकृत करने के निर्देश दिए गए। इसके साथ ही नामांतरण एवं बटवारा प्रकरणों में बिना दर्ज मामलों की पहचान कर तहसील स्तर पर निरीक्षण करने तथा प्रत्येक राजस्व न्यायालय का क्रॉस निरीक्षण कराने पर जोर दिया गया। न्यायालयों के निरीक्षण के लिए रोस्टर तैयार करने एवं भ्रमण डायरी की नियमित समीक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।
भ्रमण के दौरान श्री गोविन्द बुवाडे (परिवार के 5 सदस्य) के घर में श्रीमती देवकी बुवाडे, श्री केवलजी कसलीकर (9 सदस्य) के घर में श्रीमती मंगाबाई कसलीकर, श्री मनीराम भादे एवं श्री रामदयाल भादे (कुल 9 सदस्य) के घर में प्रशांत भादे तथा श्री लखनजी हिंगवे (7 सदस्य) के घर में मयंक हिंगवे के पूर्व में अस्वस्थ होने की जानकारी प्राप्त हुई।
दिनांक 15 अप्रैल 2026 को एकत्रित किए गए पेयजल नमूनों की परीक्षण रिपोर्ट 16 अप्रैल 2026 को प्राप्त हुई, जिसमें सभी स्रोतों का पानी पीने योग्य पाया गया तथा सभी मानक स्वीकार्य सीमा में रहे। क्लोरीनेशन के पश्चात एहतियात के तौर पर पुनः नलकूप, दो निजी कुओं एवं चार घरों से जल नमूने एकत्रित कर प्रयोगशाला में परीक्षण के लिए भेजे गए हैं।
जिला प्रशासन द्वारा पेयजल सुरक्षा एवं जनस्वास्थ्य के प्रति संवेदनशीलता के साथ निरंतर निगरानी और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है।