

हमीरपुर से ब्यूरो चीफ राजकुमार की रिपोर्ट
सुमेरपुर (हमीरपुर):
कस्बे में एक जन सेवा केंद्र संचालक द्वारा आत्महत्या किए जाने का मामला सामने आया है, जिसकी मुख्य वजह आर्थिक तंगी, होम लोन और उधार का बढ़ता दबाव बताया जा रहा है। मृतक की पत्नी खुश्बू के अनुसार उनके पति अंकित लंबे समय से कर्ज और पारिवारिक परेशानियों के कारण मानसिक तनाव में थे।
परिवार पहले से ही कठिन दौर से गुजर रहा था। ससुर के लापता होने के बाद सास पुखरायां से सुमेरपुर आकर किराए के मकान में रहने लगीं। बाद में कांशीराम कॉलोनी में आवास मिलने पर पूरा परिवार वहीं बस गया। अंकित ने जन सेवा केंद्र संचालित कर परिवार की जिम्मेदारी संभाली और मां का सहारा बने।
वर्ष 2019 में खुश्बू की शादी अंकित से हुई थी। बेहतर भविष्य के लिए अंकित ने वार्ड 15 में प्लॉट खरीदकर मकान निर्माण शुरू कराया। इसके लिए उन्होंने सीएससी आईडी के माध्यम से होम लोन लिया और दोस्तों व रिश्तेदारों से भी कर्ज लिया। बताया जा रहा है कि दो मंजिला मकान के निर्माण में करीब 30 लाख रुपये खर्च हो गए।
इसी बीच वर्ष 2022 में मां सीता का निधन हो गया और पिछले वर्ष छोटे भाई अमर ने भी आत्महत्या कर ली। लगातार पारिवारिक सदमे और आर्थिक दबाव ने अंकित को अंदर से तोड़ दिया। कर्जदाताओं की मांग और बैंक की किस्तें जमा करने में आ रही दिक्कतों के चलते वह गहरे तनाव में रहने लगे थे।
अंततः इन्हीं परिस्थितियों से परेशान होकर उन्होंने आत्मघाती कदम उठा लिया।
पति की मौत के बाद पत्नी खुश्बू पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। उनकी दो बेटियां हैं, जिनमें बड़ी बेटी गौरी (5 वर्ष) दिव्यांग है, जबकि दूसरी बेटी का जन्म महज एक सप्ताह पहले हुआ है। परिवार की स्थिति बेहद दयनीय बनी हुई है।