
जामसांवली धाम में गूंजी रामभक्ति की अलौकिक ध्वनि, जगद्गुरु रामभद्राचार्य की दिव्य रामकथा का भव्य शुभारंभ
संवाददाता धनंजय जोशी
जिला पांढुरना मध्य प्रदेश
हनुमान जन्मोत्सव के पावन अवसर पर चमत्कारिक श्री हनुमान मंदिर ‘हनुमान लोक’ जामसांवली धाम में रविवार से दिव्य रामकथा का भव्य शुभारंभ हुआ। विश्वविख्यात पद्मविभूषण तुलसीपीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामभद्राचार्य महाराज की मधुर एवं ओजपूर्ण वाणी ने पूरे परिसर को भक्तिमय बना दिया। कथा के प्रथम दिवस हजारों श्रद्धालु उपस्थित होकर भक्ति में लीन हुए और “जय श्रीराम” व “जय हनुमान” के जयघोष से वातावरण गुंजायमान हो उठा।

कथा प्रवचन के दौरान पूज्य जगद्गुरु ने रामायण के माध्यम से मर्यादा, धर्म और आदर्श जीवन का गहन संदेश दिया। उन्होंने बताया कि रामकथा मुख्यतः पांच प्रमुख लीलाओं—बाल्यकाल, विवाह, वनवास, युद्ध और राज्याभिषेक—पर आधारित है, जिनमें मानव जीवन के श्रेष्ठ आदर्श समाहित हैं। भगवान श्रीराम का जीवन सत्य और धर्म की स्थापना तथा अन्याय के अंत का प्रतीक है। उनका अवतार केवल जन्म नहीं, बल्कि मर्यादा और आदर्शों की स्थापना का दिव्य प्रसंग है।

इस दौरान उन्होंने जामसांवली धाम में विराजमान लेटे हुए हनुमान जी की अद्भुत प्रतिमा के आध्यात्मिक रहस्य पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह स्वरूप अत्यंत जागृत एवं चमत्कारिक है, जो भक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। मान्यता है कि लंका विजय के पश्चात उत्तर दिशा की ओर जाते समय हनुमान जी ने इस पवित्र स्थल पर विश्राम किया था, जिससे इसकी महत्ता और बढ़ जाती है।

कार्यक्रम में मुख्य यजमान संस्थान अध्यक्ष गोपाल शर्मा एवं प्रबंध ट्रस्टी संदीप मोहोड ने सपत्नीक पूज्य जगद्गुरु की चरण पादुका का विधिवत पूजन किया। इस अवसर पर राज्यसभा सांसद अनिल बोंडे, कलेक्टर नीरज कुमार वशिष्ठ, पुलिस अधीक्षक सुंदर सिंह कनेश, नागपुर के मुधोजी राजे भोंसले सहित कई गणमान्य अतिथियों ने उपस्थित होकर आशीर्वाद प्राप्त किया।

कथा से पूर्व चित्रकूट से नागपुर आगमन पर पूज्य जगद्गुरु का भव्य स्वागत किया गया। जामसांवली प्रवेश द्वार पर पुष्पवर्षा के साथ अभिनंदन हुआ। वारकरी संप्रदाय की पारंपरिक दिंडी यात्रा एवं पीत वस्त्रधारी महिलाओं की आकर्षक कलश यात्रा ने आयोजन को और भी दिव्यता प्रदान की। मंदिर परिसर में छात्राओं द्वारा प्रस्तुत गणेश वंदना और राम स्तुति ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
प्रथम दिवस की कथा आरती के साथ सम्पन्न हुई। द्वितीय दिवस पर भी श्रद्धालु पूज्य जगद्गुरु की अमृतमयी वाणी से रामकथा का दिव्य रसपान करेंगे।
