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संघर्ष से सफलता तक: वनिता आखरे बनीं महिलाओं की प्रेरणा

पति के निधन के बाद भी नहीं हारी हिम्मत, स्व सहायता समूह से बदली जिंदगी

संघर्ष से सफलता तक: वनिता आखरे बनीं महिलाओं की प्रेरणा

पति के निधन के बाद भी नहीं हारी हिम्मत, स्व सहायता समूह से बदली जिंदगी

संवाददाता धनंजय जोशी

जिला पांढुरना मध्य प्रदेश

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दुखों से लड़कर आत्मनिर्भर बनीं वनिता निलेश आखरे

पांढुरना – यह कहानी है पांढुर्णा के ग्राम देवखापा की 47 वर्षीय निवासी वनिता निलेश की। उनके पति निलेश आखरे की मृत्यु 15 सितम्बर 2022 को हो गई थी। पति का साथ हट जाने के बाद मानो पहाड़ टूट कर गिर गया। पति की मौत का दर्द उन्हें अंदर तक झकझोर कर गया। परिवार की हालत बिगड़ने लगी और बच्चों की पढ़ाई तथा अन्य खर्चों के लिए पैसे कम पड़ने लगे।

इसी बीच कुछ महिलाओं से उन्हें स्व सहायता समूह के बारे में जानकारी मिली। वनिता ने भी आत्मनिर्भर बनने का निर्णय लिया और वर्ष 2023 में स्व सहायता समूह से जुड़ गईं। उन्होंने “दादाजी स्व सहायता समूह” का गठन किया। अपने समूह में उन्होंने ऐसे आर्थिक रूप से कमजोर और गरीब परिवारों की महिलाओं को जागरूक कर उन्हें स्व सहायता समूह से जोड़ा।

वनिता का उद्देश्य केवल स्वयं आगे बढ़ना नहीं था, बल्कि अन्य महिलाओं को भी आर्थिक रूप से सक्षम बनाना था। इसी सोच के साथ उन्होंने अन्य समूहों का भी गठन किया और महिलाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना शुरू किया। वर्तमान में उनके समूह के माध्यम से महिलाओं को सिलाई का काम भी दिया जा रहा है, जिससे कई महिलाएं अपनी आय बढ़ाकर परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं।

आज वनिता निलेश आखरे अपने साहस, मेहनत और नेतृत्व क्षमता के कारण क्षेत्र में एक सक्षम और प्रेरणादायक महिला के रूप में जानी जाती हैं। उनका संघर्ष यह संदेश देता है कि कठिन परिस्थितियों में भी यदि हिम्मत और संकल्प हो, तो सफलता का रास्ता जरूर बनता है।

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