

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस हर साल 8 मार्च को मनाया जाता है क्योंकि 1917 में रूस की महिलाओं ने “ब्रेड एंड पीस” (रोटी और शांति) की मांग करते हुए इसी दिन ऐतिहासिक हड़ताल की थी जिसके बाद सरकार को महिलाओं को वोट का अधिकार देना पड़ा और यह तारीख (रूसी कैलेंडर के अनुसार 23 फरवरी) ग्रेगोरियन कैलेंडर में मार्च के बराबर थी जिसे बाद में संयुक्त राष्ट्र ने आधिकारिक तौर पर मान्यता दी। यह दिन महिलाओं के सामाजिक आर्थिक सांस्कृतिक और राजनीतिक अधिकारों के लिए संघर्ष और उनकी उपलब्धियों का सम्मान करने के लिए मनाया जाता है।
महिला दिवस की शुरुआत:
शुरुआती आंदोलन: इसकी जड़ें 20 वीं सदी की शुरुआत के मजदूर आंदोलनों में हैं जब 1908 में न्यूयॉर्क में महिलाओं ने बेहतर वेतन कम काम के घंटे और वोट के अधिकार के लिए प्रदर्शन किया था।
अंतर्राष्ट्रीयकरण: 1910 में जर्मन समाजवादी क्लारा जेटकिन ने कोपेनहेगन सम्मेलन में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाने का प्रस्ताव रखा जिसके बाद 1911 में पहली बार कुछ देशों में इसे मनाया गया।
ऐतिहासिक हड़ताल: 8 मार्च 1917 को रूस की महिलाओं ने “रोटी और शांति” के लिए हड़ताल की जिसने रूस में जार के शासन को खत्म कर दिया और महिलाओं को मतदान का अधिकार मिला जिससे यह तारीख महत्वपूर्ण बन गई।
1975 में संयुक्त राष्ट्र ने 8 मार्च को आधिकारिक तौर पर अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में मनाना शुरू किया और तब से यह विश्व स्तर पर मनाया जाने लगा।
डिंडोरी जिले की कुछ अन्य उल्लेखनीय महिलाएं:
- श्रीमती अंजू पवन भदौरिया (कलेक्टर ): जिले में महिला एवं बाल विकास से जुड़े विभिन्न अभियानों और “48 हजार से अधिक बालिकाओं” को सशक्त बनाने के रिकॉर्ड में अहम भूमिका निभाई है।
लहरी बाई: एक साधारण झोपड़ी में विभिन्न प्रकार के बाजरा (मिलेट) के बीजों का संरक्षण करने के लिए जानी जाती हैं, प्रधानमंत्री ने भी इनकी प्रशंसा की है।
- तेजस्विनी नारी चेतना महिला संघ की सदस्य: 17,000 से अधिक बैगा और गोंड आदिवासी महिलाएँ कोदो-कुटकी का उत्पादन और प्रोसेसिंग करके आत्मनिर्भर बन रही हैं, जो जिले की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बदल रही हैं।
- वीरांगना दुर्गावती स्वयं सहायता समूह: जोगी टिकरिया गाँव की इन महिलाओं ने मिलकर दूध डेयरी का व्यवसाय शुरू किया है, जो स्थानीय महिलाओं के लिए प्रेरणा हैं।
- इसी तरह प्रथम महिला प्रधानमंत्री स्व श्रीमति इंदिरा गांधी
महिला राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल
प्रथम शासक दिल्ली सल्तनत रजिया सुल्तान
प्रथम राज्यपाल श्रीमती सरोजिनी नायडू
मुख्यमंत्री सुचेता कृपलानी
लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार
प्रथम आईपीएस अधिकारी किरण बेदी
प्रथम आईएएस अधिकारी अन्ना राजम मल्होत्रा
प्रथम मिस वर्ल्ड फरीदा फरिया
प्रथम सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश फातिमा बीबी
प्रथम नोबेल पुरस्कार विजेता मदर टेरेसा
प्रथम एवरेस्ट विजेता बछेंद्री पाल
प्रथम भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष एनी बेसेंट
भारतीय महिला कांग्रेस अध्यक्ष सरोजिनी नायडू
प्रथम फिल्म अभिनेत्री दुर्गाबाई कामत
महिला सशक्तिकरण का स्वरूप सही
वर्तमान समय में देश में महिला सशक्तिकरण का समय चल रहा है लेकिन क्या वास्तव में महिला सशक्तिकरण हुआ है क्यांकि देश में महिला अपराधो की संख्या में गिरावट आने की बजाय बढोत्तरी ही हुई है ऐसे में हम यह कैसे कह सकते हैं कि सशक्तिकरण वास्तव में हुआ है। ऐसा नही है कि प्रायःसभी क्षेत्रो में महिलायें पुरूषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर नही चल रही हैं।लेकिन इसका दूसरा पहलू भी है जिसपर हमें गंभीरता से सोचना पडेगा और वो है महिला अपराधों में कमी कैसे आए लगातार महिला अपराधो में वृद्धि होना चिंताजनक है या यूॅ कहें कि महिला अपराधो से संबंधित कानून और अधिक कठोर बनाये जाने और उन कानूनों का अक्ष्रसः पालन किये जाने की जरूरत है क्योंकि केवल कानून सख्त होने भर से कुछ नही होगा उन कठोर कानूनों का पालन भी त्वरित और सख्ती से हो
2013 में निर्भया कांड होने के बाद महिला अपराधो के लिए बनाये गए कानून में कुछ तब्दीली की गई लेकिन आज भी देश में महिला अपराधो में बडी गिरावट नही देखी गई । अपराधियों में कानून का भय इस कदर होना चाहिए जिससे ऐसे घृणित कार्य करने वाले अपराधियों को सौ बार सोचना पडे साथ ही कानून ऐसा हो कि ऐसा अपराध करने वाले दोबार इस अपराध को करने के बारे में सोच ही न सके । तभी सही महिला सशक्तिकरण हो सकेगा।