
छत्रपति शिवाजी महाराज जयंती पर पांढुरना में श्रद्धा और उत्साह का संगम
शिवाजी चौक स्थित प्रतिमा पर पुष्पहार अर्पित कर किया गया विनम्र अभिवादन
संवाददाता धनंजय जोशी
जिला पांढुरना मध्य प्रदेश
पांढुरना। वीरता, स्वाभिमान और राष्ट्रभक्ति के प्रतीक छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती के पावन अवसर पर पांढुरना शहर में श्रद्धा और उत्साह का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। शहर के प्रमुख स्थल शिवाजी चौक पर स्थापित छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा पर जनप्रतिनिधियों एवं नागरिकों द्वारा पुष्पहार अर्पित कर विनम्र अभिवादन किया गया।

कार्यक्रम का आयोजन पूर्ण श्रद्धा एवं गरिमामय वातावरण में किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता एवं शिवाजी प्रेमी उपस्थित रहे। उपस्थितजनों ने महाराज के चित्र एवं प्रतिमा के समक्ष नमन करते हुए उनके आदर्शों—साहस, संगठन शक्ति, सुशासन —को आत्मसात करने का संकल्प लिया।
*जनप्रतिनिधियों की गरिमामयी उपस्थिति*
इस अवसर पर जिला पांढुरना भाजपा उपाध्यक्ष श्री उज्वलसिंह जी चौहान, नगराध्यक्ष श्री संदीप जी घाटोडे, भाजपा नगर मंडल अध्यक्ष श्री बंटी भैय्या छंगाणी, भाजपा नगर मंडल उपाध्यक्ष श्री पंकज जी नाईक, नगर पालिका सभापति श्री प्रदीप जी जुननकर, श्री दुर्गेश जी उइके, श्री महेन्द्र जी घोड़े सहित समस्त श्री शिवाजी मित्र मंडल के सदस्य एवं क्षेत्र की मातृशक्ति की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।

सभी अतिथियों ने अपने संबोधन में छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन चरित्र पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनका जीवन युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी स्वराज्य की स्थापना कर यह सिद्ध किया कि दृढ़ संकल्प और संगठन शक्ति से असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है।
*राष्ट्रभक्ति और सामाजिक एकता का संदेश*
वक्ताओं ने कहा कि शिवाजी महाराज केवल एक योद्धा नहीं, बल्कि एक कुशल प्रशासक और जननायक थे। उन्होंने समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर न्यायपूर्ण शासन की स्थापना की। आज के समय में उनके आदर्शों को अपनाकर समाज में एकता, सुरक्षा और विकास की दिशा में आगे बढ़ना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
कार्यक्रम के दौरान “जय भवानी, जय शिवाजी” के उद्घोष से पूरा शिवाजी चौक गूंज उठा। अंत में उपस्थित सभी नागरिकों ने राष्ट्रहित और समाज सेवा के कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया।
पांढुरना में आयोजित यह जन्मोत्सव कार्यक्रम श्रद्धा, अनुशासन और सामाजिक समरसता का प्रतीक बनकर सामने आया।
