मध्यप्रदेश

जब गुरुदेव के चरण पड़े धार्मिक नगरी में, भक्ति से सराबोर हुआ विजयराघवगढ़

जब गुरुदेव के चरण पड़े धार्मिक नगरी में, भक्ति से सराबोर हुआ विजयराघवगढ़

 

 

 

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*जब गुरुदेव के चरण पड़े धार्मिक नगरी में, भक्ति से सराबोर हुआ विजयराघवगढ़*

*नगर अध्यक्ष की अगुवाई मे हुआ भव्य स्वागत, भक्तो ने की जय जय कार, गुरुदेव ने अध्यक्ष को दिया सफलता का आशिर्वाद*

विजयराघवगढ़ कभी-कभी किसी नगर के जीवन में ऐसे क्षण आते हैं जब समय भी थम-सा जाता है और हवा तक भक्ति का आलाप गाने लगती है। ऐसा ही दिव्य क्षण उस समय साक्षात हुआ जब विश्वविख्यात महान संत श्रीहरि के साक्षात स्वरूप पूज्य इंद्रेश जी महाराज का पावन आगमन विजयराघवगढ़ की धार्मिक नगरी में हुआ। नगर की हर गली हर चौक और हर हृदय में बस एक ही स्वर गूंज रहा था जय गुरुदेव। गुरुदेव के स्वागत में सम्पूर्ण नगर मानो उत्सव में डूब गया। नगर परिषद अध्यक्ष राजेश्वरी हरीश दुवे की अगुवाई में श्रद्धा सेवा और समर्पण के साथ गुरुदेव का भव्य स्वागत किया गया। किला परिसर मार्ग स्थित मुन्नू होटल के समीप हजारों श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा और आतिशबाजी कर गुरुदेव के चरणों में अपनी आस्था अर्पित की। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो फूल नहीं बल्कि भक्तों के भाव बरस रहे हों।किला परिसर में ढोल नगाड़ों की गूंज आतिशबाजी की रोशनी और हरिहर के जयघोष के बीच गुरुदेव का दिव्य स्वागत हुआ। नगर परिषद द्वारा गुरुदेव के आगमन से पूर्व नगर के प्रमुख मार्गों की साफ-सफाई कर उन्हें पवित्र स्वरूप प्रदान किया गया। कन्याओं द्वारा कलश धारण कर किया गया स्वागत दृश्य ऐसा था जिसने हर आंख को नम और हर मन को आनंदित कर दिया। गुरुदेव ने नगर परिषद अध्यक्ष राजेश्वरी हरीश दुवे से आत्मीय भेंट कर स्नेहपूर्वक आशीर्वाद दिया और स्वागत के लिए आभार प्रकट किया। इसके पश्चात किला परिसर में विराजमान ब्रम्हदेव की विधिवत पूजा-अर्चना कर नगर के कल्याण की कामना की। वह क्षण श्रद्धा और शांति से परिपूर्ण था। कुछ समय पश्चात विजयराघवगढ़ विधायक संजय सत्येंद्र पाठक भी गुरुदेव के सान्निध्य में पहुंचे। विधायक ने श्रद्धाभाव से गुरुदेव का स्वागत कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके बाद गुरुदेव विधायक संजय सत्येंद्र पाठक के साथ रामराजा पहाड़ी स्थित हरिहर तीर्थ धाम पहुंचे जहां उन्होंने हरिहर तीर्थ धाम के निर्माण की रूपरेखा को देखा और आध्यात्मिक दृष्टि से मार्गदर्शन प्रदान किया।अंत में गुरुदेव ने संकट मोचन हनुमान जी महाराज के दर्शन कर नगर क्षेत्र और देश की सुख समृद्धि की प्रार्थना की। तत्पश्चात वे विधायक संजय सत्येंद्र पाठक के साथ कटनी के लिए प्रस्थान कर गए किंतु अपने पीछे छोड़ गए भक्ति की सुगंध शांति की अनुभूति और आशीर्वाद की अमिट छाया। नगर परिषद अध्यक्ष राजेश्वरी हरीश दुवे ने कहना कि जिस भूमि पर संतों के चरण पड़ते हैं वह भूमि तीर्थ बन जाती है और उस दिन विजयराघवगढ़ ने स्वयं को धन्य महसूस किया। यह केवल एक आगमन नहीं बल्कि आस्था संस्कार और सनातन चेतना का महापर्व था जो लंबे समय तक स्मृतियों में जीवित रहेगा।

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