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भारतमाला परियोजना में कानून की खुलेआम धज्जियां, बिना नंबर प्लेट दौड़ रही गाड़ियां Kaimur se Rupesh Kumar Dubey ki report

परशुराम सेना के अध्यक्ष विनोद तिवारी ने भी कड़े शब्दों में विरोध जताते हुए कहा कि

भारतमाला परियोजना में कानून की खुलेआम धज्जियां, बिना नंबर प्लेट दौड़ रही गाड़ियां

 

 

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जिला प्रशासन और परिवहन विभाग की चुप्पी पर गंभीर सवाल

 

 

 

 

 

 

 

कैमूर जिले में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी भारतमाला परियोजना के तहत बन रहे भारतमाला एक्सप्रेसवे के निर्माण में कानून को ताक पर रखकर बिना नंबर प्लेट, बिना रजिस्ट्रेशन और परिवहन विभाग के नियमों को नजरअंदाज कर गाड़ियों का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि यह सब कुछ जिला प्रशासन और परिवहन विभाग की नाक के नीचे हो रहा है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

भारत सरकार की इस मेगा परियोजना का जिम्मा कैमूर जिले में पी.एन.सी. इन्फ्राटेक लिमिटेड को सौंपा गया है। लेकिन निर्माण कार्य में लगी कंपनी और ठेकेदारों पर आरोप है कि उन्होंने परिवहन नियमों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया है। एक्सप्रेसवे निर्माण में भारी वाहन बिना नंबर प्लेट और वैध कागजात के खुलेआम सड़कों पर दौड़ रहे हैं, जो न सिर्फ कानून का उल्लंघन है बल्कि सुरक्षा के लिहाज से भी गंभीर खतरा है।

भभुआ निवासी दुर्गा शर्मा ने प्रशासन की दोहरी नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि,

“अगर कोई आम आदमी बिना हेलमेट दोपहिया चला लेता है तो पुलिस तुरंत चालान काट देती है, लेकिन भारतमाला जैसे बड़े प्रोजेक्ट में नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं और प्रशासन आंख मूंदे बैठा है। क्या कानून सिर्फ आम जनता के लिए है?”

वहीं परशुराम सेना के अध्यक्ष विनोद तिवारी ने भी कड़े शब्दों में विरोध जताते हुए कहा कि,

“जब ट्रैफिक पुलिस और परिवहन विभाग रोज गरीब-मजदूरों पर फाइन ठोकता है, तो फिर एक्सप्रेसवे निर्माण में नियम तोड़ने वाली कंपनियों पर कार्रवाई क्यों नहीं होती? यह साफ तौर पर सिस्टम की मिलीभगत और पक्षपात को दिखाता है।”

सबसे चौंकाने वाला खुलासा तब हुआ जब पी.एन.सी कंपनी के कुछ कर्मचारियों ने नाम न छापने की शर्त पर स्वीकार किया कि कंपनी द्वारा परिवहन विभाग के नियमों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि वे मजबूर हैं और इस पर सवाल उठाने की स्थिति में नहीं हैं। वहीं, कंपनी के मैनेजर से संपर्क करने की कोशिश नाकाम रही।

जब इस पूरे मामले पर जिला परिवहन पदाधिकारी से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि,

“मुझे इस तरह की कोई जानकारी नहीं है। अगर शिकायत मिलती है तो टीम बनाकर जांच कराई जाएगी।”

अब सवाल यह उठता है कि क्या बिना नंबर प्लेट की गाड़ियां प्रशासन को दिखाई नहीं देतीं?

क्या जांच के लिए किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है?

या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?

भारत जैसे देश में जहां सड़क सुरक्षा को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, वहीं सरकारी प्रोजेक्ट में इस तरह की लापरवाही और नियमों की अनदेखी प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करती है। जरूरत है कि जिला प्रशासन और परिवहन विभाग तत्काल जांच कर दोषी कंपनी और ठेकेदारों पर सख्त कार्रवाई करे, ताकि कानून का डर सिर्फ आम आदमी तक सीमित न रहे।

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