
मिलावटी दूध विक्रेताओं की होगी जांच
उत्कृष्ट पशुपालकों को किया जायेगा हर माह सम्मानित
कलेक्टर श्री तिवारी ने पशुपालन एवं डेयरी विकास विभाग की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को दिये निर्देश
(10 दिसंबर) – दुग्ध उत्पादन समितियों को जागरूक किया जाय और विस्तार कर इससे अधिक से अधिक लोगों को जोड़ा जाय। ताकि जिले में दुग्ध उत्पादन बढ़े और रोजगार के नये अवसर पैदा हों और लोगों की आमदनी बढ़े। कलेक्टर श्री आशीष तिवारी ने यह निर्देश पशुपालन एवं डेयरी विकास के कार्यों की समीक्षा के दौरान दिये।
बैठक में डिप्टी कलेक्टर प्रदीप मिश्रा एवं उपसंचालक पशुपालन एवं डेयरी विकास डॉ. आर के सोनी सहित पशु चिकित्सा अधिकारी, पशु चिकित्सा विस्तार अधिकारी एवं दुग्ध समितियों के प्रतिनिधि एवं पदाधिकारी भी मौजूद रहे।
कलेक्टर श्री तिवारी ने दूध में मिलावट की जांच हेतु खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को अभियान चलाकर जांच करने के निर्देश दिये। उन्होंने दुधारू पशु नस्ल सुधार पर जोर देते हुये कृत्रिम गर्भाधान और सेक्स सॉर्टेड सीमन गतिविधियों के बारे में ग्रामीणों को सघन जानकारी देने और लाभान्वित करने की बात कही।
कलेक्टर ने कहा कि पशु उपचार, नस्ल सुधार जैसे कार्यों के लिये हर पंचायत में मैत्री (मल्टी परपज आर्टिफिशियल इन्सेमिनेशन टेक्नीशियन इन रूरल इंडिया) गौसेवक नियुक्त किये जाने चाहिये। मैत्री कार्यकर्ताओं को 5 रूपये प्रति पशु की दर से भुगतान भी किया जाता है।
बैठक में पशुपालकों और समितियों के सदस्यों ने शहर के कुछ विशेष स्थानों में मिलावटी दूध बिक्री के संबंध में कलेक्टर श्री तिवारी को जानकारी दी। बताया गया कि गोल बाजार, चाण्डक चौराहा, दुर्गा चौक, गर्ग चौराहा आदि स्थानों में दोपहर तक मिलावटी दूध विक्रेताओं की मौजूदगी रहती है। इस पर कलेक्टर ने त्वरित संज्ञान लिया और मिलावटी दूध की जांच कर संबंधितों के विरूद्ध कार्यवाही के निर्देश दिये।
कलेक्टर ने कृत्रिम गर्भाधान के माध्यम से पशुओं के नस्ल सुधार कार्यक्रम के लिये तय लक्ष्यों की शत-प्रतिशत पूर्ति की हिदायत दी। कलेक्टर ने कहा कि दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में बेहतर कार्य करने वाले उन्नत और अच्छे पशुपालकों को हर माह सम्मानित किया जाये। ताकि अन्य पशुपालक भी इनके अनुभवों से सीख लेकर दुग्ध उत्पादन बढ़ा सकें।
कलेक्टर ने राष्ट्रीय दुग्ध विकास बोर्ड और जबलपुर दुग्ध संघ के बीच आपसी टाईअप कर नवीन दुग्ध समितियों की संख्या को बढ़ाने और जिले के ग्रामीण क्षेत्र में अधिक से अधिक मिल्क रूट बनाने के निर्देश दिये।
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