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उत्पन्ना एकादश कल, सात्विक भोजन और ब्रह्मचर्य का पालन करें – संजय लवानियां

उत्पन्ना एकादश कल, सात्विक भोजन और ब्रह्मचर्य का पालन करें – संजय लवानियां

रिपोर्टर मनमोहन गुप्ता कामां डीग 9783029649

कामां – 15 नवंबर को मनाई जायेगी उत्पन्ना एकादशी
हिन्दू पंचांग के अनुसार, 15 नवंबर को देर रात 12 बजकर 49 मिनट पर अगहन महीने (मार्गशीर्ष) के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि शुरू होगी। वहीं, इसका समापन अगले दिन 16 नवंबर को देर रात 02 बजकर 37 मिनट पर होगा। हिंदू धर्म में उदया तिथि मान्य है। इसलिए 15 नवंबर को उत्पन्ना एकादशी मनाई जाएगी। वहीं, इसका पारण 16 नवंबर को दोपहर 12 बजकर 55 मिनट से लेकर दोपहर 03 बजकर 08 मिनट के बीच किया जाएगा।

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एकादशी से एक दिन पहले दशमी तिथि की रात में सात्विक भोजन और ब्रह्मचर्य का पालन करें।
ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और साफ कपड़े धारण करें।
भगवान विष्णु के समक्ष हाथ में जल, फूल और अक्षत लेकर व्रत का संकल्प लें।
भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित करें।
उन्हें रोली, चंदन, अक्षत, पीले फूल, फल और तुलसी दल अर्पित करें।
‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें।
इसके बाद एकादशी की व्रत कथा पढ़ें और अंत में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आरती करें।
इस दिन केवल फलाहार ही करना चाहिए।
इस दिन चावल का सेवन वर्जित माना गया है।
अगर हो पाए, तो रात के समय भगवान का भजन-कीर्तन करें।
अगले दिन, यानी 16 नवंबर को द्वादशी तिथि पर शुभ मुहूर्त में ब्राह्मण को भोजन कराएं या दान दें।
इसके बाद व्रत का पारण करें।
पारण हमेशा द्वादशी तिथि को करना चाहिए।

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