

जाको राखे साईयां मार सकेना कोए, 15 घंटे बाद मिला माज
रिपोर्टर मनमोहन गुप्ता कामां डीग 9783029649
कामां – डीग जिले के कामा उपखंड का बिलक गांव मंगलवार शाम से जिस माज की चिंता में डूबा था, उस पांच वर्षीय बालक के बुधवार सुबह सुरक्षित मिलने से पूरे क्षेत्र में खुशियों की लहर दौड़ गई। यह कहानी सिर्फ लापता होने और मिलने की नहीं, बल्कि एक बच्चे के साहस, सामुदायिक प्रेम और अटूट विश्वास की है। मंगलवार शाम को माज अपनी बुआ को खाना देने के लिए गांव के पास के पहाड़ पर गया था। देर शाम बुआ के साथ नीचे लौटते वक्त, झाड़ियों के घने जंगल में वह रास्ता भटक गया और अपनी बुआ से बिछड़ गया। अंधेरा गहराने के साथ ही मासूम माज के लापता होने की खबर ने पूरे परिवार और गांव को बेचैन कर दिया। पिता रफीक और ग्रामीणों ने रात भर सर्द और अंधेरे पहाड़ में खोजबीन की, लेकिन निराशा ही हाथ लगी। करीब 15 घंटों की असहनीय प्रतीक्षा के बाद, बुधवार सुबह उम्मीदों का सवेरा आया। एक ग्रामीण जब लकड़ियां लेने पहाड़ पर गया, तो उसने झाड़ियों के बीच माज को शांत और सुरक्षित बैठा पाया। कड़ाके की ठंड और जंगली जानवरों के डर के बावजूद, माज का सुरक्षित मिलना किसी चमत्कार से कम नहीं था। माज के सकुशल लौटने की खबर बिजली की तरह पूरे गांव में फैल गई। ग्रामीण दौड़े-दौड़े पहाड़ पर पहुँचे। बच्चे को गले लगाकर घर लाया गया। यह क्षण सिर्फ एक परिवार की खुशी का नहीं था, बल्कि पूरे बिलक गांव के सामूहिक राहत और प्रेम का था। पूरा गांव रफीक के आंगन में इकट्ठा हो गया। मिठाइयाँ बांटी गईं और हर किसी ने माज को आशीर्वाद दिया। इस छोटे से ‘योद्धा’ ने 15 घंटे की परीक्षा को पास कर लिया। ग्रामीणों ने नम आँखों से कहा, “यह भगवान की कृपा है। हमारा माज सुरक्षित लौट आया।” यह घटना हमेशा बिलक गांव के लिए एक ऐसी याद रहेगी, जहाँ उम्मीद ने अंधेरे पर विजय पाई।
