



केशवजी गौडिया मठ मथुरा से कामवन आये हजारों कृष्णभक्त
रिपोर्टर मनमोहन गुप्ता कामां डीग 9783029649
कामां- ब्रज चौरासी कोस यात्रा कर रहे सैकड़ों पश्चिम बंगाल व अन्य राज्यों क़े धर्मावलंबियों ने तीर्थराज विमलकुण्ड विराजित मुख्य मन्दिर विमल बिहारी के दर्शन व पूजन कर तीर्थराज क़े आचमन व परिक्रमा की। महाप्रसाद तीर्थराज विमलकुण्ड पर सभी ने ग्रहण किया।
मन्दिर विमल बिहारी जी के सेवाअधिकारी संजय लवानिया ने तीर्थराज का माहात्म्य सुनाया। उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि पुरुषोत्तम भगवान् कृष्ण को केवल प्रेम के बन्धन द्वारा ही बांधा जा सकता है I और इस दुर्लभ प्रेम की प्राप्ति आसानी से कार्तिक मास, दामोदर मास में नियम लेकर सेवा करने से सुलभ हो जाती है।इस भूमि का कण-कण राधा-कृष्ण की पावन लीलाओं का साक्षी है। यही कारण है कि समूचे ब्रज मण्डल का दर्शन व उसकी पूजा करने के उद्देश्य से देश-विदेश से असंख्य तीर्थ यात्री यहां वर्ष भर आते रहते हैं।
ब्रज का हर वृक्ष देव हैं, हर लता देवांगना है, यहाँ की बोली में माधुर्य है, बातों में लालित्य है, पुराणों का सा उपदेश है, यहाँ की गति ही नृत्य है, रति को भी यह स्थान त्याग करने में क्षति है, कण-कण में राधा-कृष्ण की छवि है, दिशाओं में भगवद नाम की झलक, प्रतिपल कानों में राधे-राधे की झलक, देवलोक-गोलोक भी इसके समक्ष नतमस्तक हैं। सम्पूर्ण ब्रज-मण्डल का प्रत्येक रज-कण, वृक्ष, पर्वत, पावन कुण्ड-सरोवर और श्री यमुनाजी श्रीप्रिया-प्रियतम की नित्य निकुंज लीलाओं के साक्षी हैं। श्री कृष्ण जी ने अपने ब्रह्मत्व का त्याग कर सभी ग्वाल बालों और ब्रज गोपियों के साथ अनेक लीलाएँ की हैं। यहाँ उन्होने अपना बचपन बिताया। जिसमें उन्होने ग्वाल बालों के साथ क्रीड़ा, गौ चारण, माखन चोरी, कालिया दमन आदि अनेक लीलाएँ की हैं। भगवान कृष्ण की इन लीलाओं पर ही ब्रज के नगर, गाँव, कुण्ड, घाट आदि स्थलों का नामकरण हुआ है।सभी भक्तों ने पैदल कामवन विराजित तीर्थराज विमलकुण्ड ,मुख्य मन्दिर विमल बिहारी सहित श्रीकृष्ण की क्रीड़ास्थलियों गया कुण्ड ,चरण पहाड़ी ,भोजन थाली ,खिसलनी शिला ,भामासुर की गुफा ,महाप्रभु जी की बैठक ,श्रीकुण्ड ,सेतुबन्ध रामेश्वर ,लंका-यशोदा,गया कुण्ड ,कामेश्वर महादेव ,पंचमुखी महादेव,पांच पांडव , वृन्दादेवी ,गोविन्ददेव जी ,गोपीनाथजी ,चौरासीखम्भा ,
गोकुल चन्द्रमा ज़ी ,मदनमोहन ज़ी आदि के दर्शन किये।सभी भक्त कामवन दर्शन कर वृन्दावन प्रस्थान कर गये।