अरुण कुमार की एंट्री प्रतिपक्ष के कदम का सीधा जवाब
संवाददाता। रणजीत कुमार। जहानाबाद। के पूर्व सांसद अरुण कुमार ने अपने बेटे ऋतुराज के साथ जेडीयू ज्वाइन कर लिया है। वे अपने इलाके के जहानाबाद, अरवल या घोसी सीट से जेडीयू के उम्मीदवार हो सकते हैं। जेडीयू मिनल समारोह में वे जेडीयू में शामिल हो गए। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री ललन सिंह, राज्य सभा सांसद संजय झा, मत्री विजय कुमार चौधरी और अशोक चौधरी मौजूद रहे। जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने कहा कि अरुण कुमार, चंद्रेश्वर चंद्रवानी और जितने साथी पार्टी में शामिल हुए हैं। उनका हम स्वागत करते हैं। उनकी घर वापसी हुई है। जंगल राज की वापसी को रोकने के लिए साथ आ रहे हैं। मैं सिद्धांतवादी रहा हूं, कभी विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ा हूं। इस बार भी नहीं लड़ूंगा। राहुल शर्मा के आरजेडी में जाने से जेडीयू समझ गई है कि जहानाबाद की जातीय राजनीति में असंतुलन की स्थिति बन सकती है। यह भी ध्यान रखने वाली बात है कि पिछले लोकसभा चुनाव यानी 2024 में अरुण कुमार ने बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा था।
जहानाबाद की राजनीति हमेशा से वर्चस्व की लड़ाई की क्षेत्र रही है। यहां लंबे समय से स्थानीय प्रभावशाली नेताओं के बीच मुकाबला चलता रहा है। तेजस्वी यादव की कोशिश है कि इस क्षेत्र में आरजेडी की पकड़ और गहरी बनाई जाए। इसलिए उन्होंने राहुल शर्मा को पार्टी में जगह देकर एक बड़ा संदेश दिया है। दूसरी ओर जेडीयू भी पीछे हटने को तैयार नहीं है और अरुण कुमार की एंट्री को प्रतिपक्ष के कदम का सीधा जवाब माना जा रहा है।
दरअसल, इससे पहले भी उनकी सदस्यता को लेकर तारीख तय हुई थी, लेकिन जेडीयू के कुछ दिग्गज नेताओं की आपत्तियों के कारण उस समय कार्यक्रम टाल दिया गया था। पार्टी इस बार किसी विरोध की संभावना को दरकिनार करते हुए उन्हें साथ लाया। अरुण कुमार की वापसी जेडीयू के लिए केवल शामिल कराने का मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे राजनीतिक संतुलन साधने की कोशिश भी जुड़ी है। जहानाबाद के पूर्व विधायक राहुल शर्मा ने जेडीयू को छोड़कर पटना में तेजस्वी यादव की मौजूदगी में राष्ट्रीय जनता दल का दामन थाम लिया था। राहुल शर्मा को आरजेडी में शामिल करके विपक्ष ने जहानाबाद क्षेत्र में अपनी पैठ मजबूत करने की कोशिश की है। इसे देखते हुए जेडीयू अब अरुण कुमार को सामने रखकर इस राजनीतिक चाल का तोड़ तैयार कर रही है।


