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किसकी शह पर यह काण्ड कराया गया? पूरी प्लानिंग लगती है !

किसकी शह पर यह काण्ड कराया गया? पूरी प्लानिंग लगती है !

 

राहुल सेन मांडव मो 9669141814

 

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बार से सस्पेंडेड वकील राकेश किशोर ने कहा “मैंने परमात्मा के आदेश का पालन किया. CJI को जूते मारने का कोई पछतावा नहीं. परमात्मा मुझसे यही कराना चाहता था. इसके लिए कोर्ट या बार से माफ़ी नहीं मांगेंगे। ”

अब आप पता करते रहिये, यह परमात्मा रायसीना हिल के किसी आलीशान-अभेद कार्यालय में विराजमान है, या लोक कल्याण मार्ग की किसी कोठी में? “परमात्मा” है, तभी इस “भटकती आत्मा” में हिम्मत आई, और इतना बड़ा काण्ड कर बैठा. “परमात्मा” जी मिलें कभी, तो मैं भी पूछूँ, कि क्या आप इससे भी नीचे गिर सकते हैं?

 

71 साल का वकील राकेश किशोर, 2009 में दिल्ली बार काउंसिल (बीसीडी) में प्रैक्टिस के लिए रजिस्टर्ड हुए थे। मान्यवर, मयूर विहार फेज 1 में रहते हैं। राकेश किशोर ने यदि भूल से भी “परमात्मा” के बारे में मुंह खोला, उनके प्राण पखेरू मुक्त कर दिए जायेंगे.

 

जूता फेंकने की वजह

 

यह घटना मध्य प्रदेश के खजुराहो परिसर में क्षतिग्रस्त विष्णु प्रतिमा की पुनर्स्थापना से जुड़ी याचिका के सिलसिले में हुई थी. 16 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने खजुराहो के जवारी मंदिर में भगवान विष्णु की सात फुट ऊंची मूर्ति के पुनर्निर्माण और पुनः स्थापना के लिए याचिका खारिज कर दी थी. कोर्ट ने इसे प्रचार हित याचिका करार दिया.

 

चीफ जस्टिस गवई ने क्या कहा था?

 

चीफ जस्टिस गवई ने कहा था, “यह पूरी तरह से प्रचार हित याचिका है. जाइए और स्वयं भगवान से कुछ करने के लिए कहिए. यदि आप भगवान विष्णु के प्रबल भक्त हैं तो प्रार्थना कीजिए और थोड़ा ध्यान भी कीजिए.” इस टिप्पणी पर हिंदूवादी संगठनों ने नाराजगी जाहिर की थी और सोशल मीडिया पर भी इस पर व्यापक बहस हुई.

 

क्या जस्टिस गवई की छवि एंटी हिन्दू बनाई जा रही है?

 

पिछले हफ्ते ही भारत के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई की मां कमलताई गवई ने महाराष्ट्र के अमरावती में होने वाले संघ के शताब्दी कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल नहीं होने का फैसला किया। कमलताई गवई ने खुले पत्र में 5 अक्टूबर के कार्यक्रम के लिए सभी को शुभकामनाएं दीं, और कहा कि वह आरएसएस के शताब्दी कार्यक्रम में चीफ गेस्ट नहीं बनेंगी।

कमलताई गवई ने पत्र में लिखा कि जैसे ही कार्यक्रम की खबर प्रकाशित हुई, कई लोगों ने न केवल मेरी, बल्कि स्वर्गीय दादासाहेब गवई (उनके पति, बिहार के पूर्व राज्यपाल आर.एस. गवई) की भी आलोचना और आरोप लगाना शुरू कर दिया। हमने (डॉ. बी.आर.) आंबेडकर की विचारधारा के अनुसार अपना जीवन जिया है, जबकि दादासाहेब गवई ने अपना जीवन आंबेडकरवादी आंदोलन को समर्पित कर दिया था। अलग विचारधारा के मंच पर अपनी विचारधारा साझा करना भी जरूरी है, जिसके लिए साहस की जरूरत होती है।

 

दलित राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की चुप्पी !

 

अगले महीने 23 नवंबर 2025 को मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई अवकाश ग्रहण करेंगे. इतना वक़्त इज़्ज़त-प्रतिष्ठा से काटना मुश्किल हो रहा है. सबसे दुखद है, इस पूरे प्रकरण पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का चुप रहना. अफ़सोस के एक शब्द नहीं. और जिस रंग-बिल्ला की शह पर इस तरह की गुंडई हो रही है, वो क्यों भला कुछ बोले?

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