
ट्रॉमा सेंटर (100 शैय्या) लखनऊ रोड, हरदोई में तैनात चिकित्सक एवं स्टाफ द्वारा पत्रकारों से अभद्र व्यवहार, गाली-गलौज एवं रिश्वतखोरी के गंभीर आरोपों के संबंध में।
नेहा दीक्षित (जिला प्रतिनिधि, HNN 24×7, हरदोई एवं मंडल महासचिव, लखनऊ मंडल – पत्रकार एकता एसोसिएशन उत्तर प्रदेश) तथा सहयोगी राकेश कुमार (जिला प्रतिनिधि, रफ्तार मीडिया एवं प्रदेश सचिव, पत्रकार एकता एसोसिएशन उत्तर प्रदेश) दिनांक 15.09.2025 को पीड़िता श्रीमती पूजा की सूचना पर जिला अस्पताल स्थित 100 शैय्या ट्रॉमा सेंटर, लखनऊ रोड, हरदोई पहुँचे।
पीड़िता द्वारा अवगत कराया गया कि वहां पर तैनात चिकित्सक डॉ. सुजीत कुमार एवं स्टाफ कर्मी रवि ने मेडिकल कराने के नाम पर ₹2000 की मांग की। जब प्रार्थिनी एवं उनके सहयोगी ने आपत्ति जताते हुए कहा कि “मरीज का तत्काल मेडिकल किया जाए तथा पैसों की मांग अनुचित है”, तो संबंधित स्टाफ अचानक उग्र हो गया।
आज भी कई पीड़ितों ने मीडिया से आपबीती बतायी की कोई भी जाँच बिना पैसों के नहीं होती हैं और उसकी रसीद भी नहीं दी जाती है जहाँ पीड़ित ने बताया की जाच के नाम पर किसी से 700 और किसी 900 रुपये लिये गये
उक्त दोनों व्यक्तियों द्वारा पत्रकारों के साथ न केवल गाली-गलौज व अभद्र व्यवहार किया गया बल्कि मारपीट की स्थिति तक बन गई। अत्यंत आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग करते हुए मां-बहन की भद्दी गालियां दी गईं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रार्थिनी ने तत्काल मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमएस) डॉ. अनिल शुक्ला को इस घटना से अवगत कराया। किंतु, अत्यंत खेदजनक है कि जब प्रार्थिनी ने यह कहा कि “हम पत्रकार हैं और आपके स्टाफ द्वारा अवैध वसूली की जा रही है”, तो स्वयं सीएमएस महोदय भी आक्रोशित हो उठे और अपशब्द कहे। उन्होंने यहां तक कह दिया कि “इन पत्रकारों को बाहर निकालो, अस्पताल परिसर में कोई पत्रकार प्रवेश न करे।” इस प्रकार, न केवल डॉ. सुजीत कुमार एवं स्टाफ रवि ने अभद्रता की, बल्कि सीएमएस स्तर पर भी असंवेदनशील व अप्रत्याशित प्रतिक्रिया सामने आई।
इसके उपरांत, दिनांक 16.09.2025 को प्रार्थिनी एवं सहयोगी मुख्य चिकित्सा अधिकारी श्री भवनाथ पांडे से मिले। उन्होंने “देखेंगे” कहकर मामले को टाल दिया और गोलमोल उत्तर दिया। लेकिन जब हम अस्पताल भवन से बाहर निकले तो वही डॉ. सुजीत कुमार एवं स्टाफ रवि अपने अन्य सहयोगियों के साथ पुनः उपस्थित होकर गाली-गलौज करने लगे और धमकी दी कि – “अगर ये पत्रकार इधर आए तो पकड़कर मारेंगे, देखेंगे क्या कर सकते हैं।
यह घटना न केवल चिकित्सा संस्थान की साख पर प्रश्नचिह्न लगाती है बल्कि मीडिया कर्मियों की गरिमा, स्वतंत्रता एवं सुरक्षा पर भी सीधा आघात है। पत्रकारों पर अभद्रता करना, गाली देना, रिश्वतखोरी करना एवं मारपीट की धमकी देना कानूनन दंडनीय अपराध है।
इस पूरे प्रकरण से जनपद के पत्रकार समाज में गहरा आक्रोश व्याप्त है। यदि दोषियों पर शीघ्र कठोर कार्रवाई नहीं की गई तो पत्रकार संघ मजबूर होकर उग्र आंदोलन हेतु बाध्य होगा।
1. संलग्न वीडियो एवं साक्ष्यों की तत्काल जांच कराई जाए।
2. दोषी चिकित्सक डॉ. सुजीत कुमार, स्टाफ रवि एवं प्रकरण में शामिल अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।
3. अस्पताल परिसर में पत्रकारों के साथ भविष्य में इस प्रकार की अभद्र घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने हेतु स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएँ।
आपकी कृपा से दोषियों के विरुद्ध शीघ्र न्यायोचित कार्रवाई की अपेक्षा है।