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भंडारा के साथ श्रीमद्‌भागवत सप्ताह ज्ञानयज्ञ पूर्ण

भंडारा के साथ श्रीमद्‌भागवत सप्ताह ज्ञानयज्ञ पूर्ण

रिपोर्टर मनमोहन गुप्ता कामां 9783029649


कामां डीग जिले के कस्वा कामां स्थित तीर्थराज विमलकुण्ड विराजित मदनगोपाल सिद्धबाबा मन्दिर पर सोमवार 8 सितम्बर से 14 सितम्बर तक महन्त सच्चिदानंद महाराज क़े तिरोभाव क़े उपलक्ष में आयोजित
श्रीमद् भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ महोत्सव का समापन सोमवार को हवन व भंडारा के साथ किया गया। सुबह भक्तों ने हवन पूरा किया। इसके बाद भंडारा शुरू हुआ। सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भंडारा में प्रसाद ग्रहण किया।
कथावाचक व्यास रामकुमार बरसाना ने कथा के सफल समापन पर कामवन वासियों को बधाई दी, साथ ही कहा कि आप सभी भक्त अच्छे संतों के सानिध्य में रहे। उनके विचारों को सुने। अच्छे गुण से ही मनुष्यों में शुभ विचार आते हैं। जीवन में इसका फल भी मिलता है। उन्होंने कहा कि हर इंसान को उसके अच्छे व बुरे कर्म का फल मिलता है। इसे भगवान भी नहीं बदल सकता।
हवन से वातावरण एवं वायुमंडल शुद्ध होने के साथ-साथ व्यक्ति को आत्मिक बल मिलता है। व्यक्ति में धार्मिक आस्था जागृत होती है। दुर्गुणों की बजाय सद्गुणों के द्वार खुलते हैं। यज्ञ से देवता प्रसन्न होकर मनवांछित फल प्रदान करते हैं। उन्होंने बताया कि भागवत कथा के श्रवण से व्यक्ति भवसागर से पार हो जाता है। श्रीमद्भागवत से जीव में भक्ति, ज्ञान एवं वैराग्य के भाव उत्पन्न होते हैं। इसके श्रवण मात्र से व्यक्ति के पाप-पुण्य में बदल जाते हैं। विचारों में बदलाव होने पर व्यक्ति के आचरण में भी स्वयं बदलाव हो जाता है। आचार्य ने भंडारे के प्रसाद का भी वर्णन किया। उन्होंने कहा कि प्रसाद तीन अक्षर से मिलकर बना है। पहला प्र का अर्थ प्रभु, दूसरा सा का अर्थ साक्षात व तीसरा द का अर्थ होता है दर्शन। जिसे हम सब प्रसाद कहते हैं। हर कथा या अनुष्ठान का तत्वसार होता है जो मन बुद्धि व चित को निर्मल कर देता है। मनुष्य शरीर भी भगवान का दिया हुआ सर्वश्रेष्ठ प्रसाद है। जीवन में प्रसाद का अपमान करने से भगवान का ही अपमान होता है। भगवान का लगाए गए भोग का बचा हुआ शेष भाग मनुष्यों के लिए प्रसाद बन जाता है।
कथावाचक ने कहा कि भागवत की कथा सुनने से मुक्ति मिलती है। उन्होंने भक्तों को भागवत के अर्थ को समझाया। कथा की पूर्णाहुति पर श्रीमद्भागवत महापुराण की सूची अध्याय की कथा भी सुनाई गई। इस मौके पर महन्त मोहनदास ,राधामाधव दास ,प्राण गोविन्द व नन्दकिशोर दास ,गोपाल दास ,राधाकृष्ण दास , सेठ हजारीलाल दिल्ली ,सेवायत संजय लवानिया ,विक्रम , सागर ,साकेत ,आशीष ,दिनेश गर्ग, नरेश छत्ता वाले,गोपाल शास्त्री ,पिंकी शर्मा ,मीनाकुमारी ,गोपाल प्यारे ,अशोक शर्मा ,श्याम ,सर्वेश सैनी ,गोपाल सहित सैकड़ों महिलायें,पुरुष ,साधुजन व भक्तजन मौजूद रहे

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