
अहिल्यानगर : महाराष्ट्र के अहिल्यानगर जिले के श्रीरामपुर स्थित सब रजिस्ट्रार (दुय्यम निबंधक) कार्यालय पर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाया गया है। पत्रकार राजेश बोरुडे, शिवाजी दांडगे, और सुधीर तुपे ने इस संबंध में इंस्पेक्टर जनरल ऑफ रजिस्ट्रेशन और कंट्रोलर ऑफ स्टैंप्स, पुणे को एक विस्तृत शिकायत भेजी है। इस शिकायत से सरकारी कार्यालयों में चल रहे भ्रष्टाचार का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
शिकायतकर्ता पत्रकारों के अनुसार, श्रीरामपुर सब रजिस्ट्रार कार्यालय में कोई भी दस्तावेज़ कानूनी रूप से पंजीकृत कराने के लिए आम नागरिकों से निर्धारित शुल्क के अलावा भारी रिश्वत मांगी जाती है। आरोप है कि यह रिश्वत सीधे तौर पर नहीं, बल्कि कुछ विशिष्ट दलालों और भू-माफियाओं के माध्यम से ली जाती है, जो अधिकारियों की मिलीभगत से कार्यालय में खुलेआम घूमते हैं।
पत्र में यह भी बताया गया है कि आवश्यक कागजात होने के बावजूद कई दस्तावेजों का पंजीकरण जानबूझकर रोक दिया जाता है। इसके लिए अनावश्यक कमियां निकाली जाती हैं, जिससे नागरिकों को मानसिक और आर्थिक परेशानी होती है। बाद में, उन्हीं दस्तावेजों का पंजीकरण उन्हीं दलालों को पैसे देने पर गैरकानूनी तरीके से कर दिया जाता है।
शिकायत में यह भी संदेह जताया गया है कि इस कार्यालय में जाली कागजात का उपयोग करके कई फर्जी दस्तावेजों का पंजीकरण हुआ है। इससे सरकार को राजस्व का भारी नुकसान हो रहा है और जमीन के असली मालिकों के अधिकार खतरे में पड़ गए हैं।
पत्रकारों ने यह भी आरोप लगाया है कि सब रजिस्ट्रार और उनसे जुड़े दलालों ने इन गैरकानूनी गतिविधियों से बड़ी मात्रा में अवैध संपत्ति जमा की है, जिसकी गहन जांच की जानी चाहिए।
इन गंभीर आरोपों के आधार पर, शिकायतकर्ताओं ने प्रशासन से कुछ ठोस कदम उठाने की अपील की है:
श्रीरामपुर के सब रजिस्ट्रार और संबंधित दलालों के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के तहत तत्काल मुकदमा दर्ज कर गहन जांच शुरू की जाए।
पिछले तीन साल में कार्यालय में हुए सभी दस्तावेज़ पंजीकरणों की एक विशेष जांच दल (SIT) से जांच कराई जाए और फर्जी पाए गए रिकॉर्ड को रद्द किया जाए।
आरोपियों द्वारा अर्जित अवैध संपत्ति को जब्त करने की कार्रवाई की जाए।
कार्यालय में पारदर्शिता लाने के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं और उनकी लाइव फुटेज सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की जाए।
इस पत्र की प्रतिलिपि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री, राजस्व मंत्री और अपर मुख्य सचिव को भी भेजी गई है। शिकायतकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि इन मांगों पर तुरंत और सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो वे इस भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन करने को मजबूर होंगे। अब देखना यह है कि इस गंभीर शिकायत पर अधिकारी क्या कार्रवाई करते हैं।
