। झारखंड सरकार द्वारा JSSC-CGL 2024 और अन्य परीक्षाओं को रद्द करने के फैसले के बाद राज्य में अभ्यर्थियों के बीच दो तरह की तस्वीर देखने को मिल रही है। एक ओर लंबे समय से परीक्षा में कथित अनियमितताओं का विरोध कर रहे छात्रों ने फैसले का स्वागत किया है, वहीं दूसरी ओर परीक्षा पास कर नियुक्त हो चुके करीब 2,000 अभ्यर्थियों के सामने नौकरी और भविष्य को लेकर बड़ा संकट खड़ा हो गया है।सरकार ने छात्रों के करीब एक महीने चले आंदोलन के बाद सोमवार को जेएसएससी-सीजीएल और अन्य परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा की। इसके बाद रांची में प्रदर्शन कर रहे चयनित अभ्यर्थियों ने अपनी पीड़ा जाहिर की। कई अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने नौकरी मिलने के बाद दूसरी नौकरी छोड़ी, परिवार की जिम्मेदारियां संभालीं और अब अचानक उनके सामने भविष्य को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई है।
शिक्षक की नौकरी छोड़कर बने थे सरकारी कर्मचारी
चतरा निवासी राघवेंद्र ने बताया कि मुख्यमंत्री ने स्वयं उन्हें नियुक्ति पत्र सौंपा था। JSSC-CGL में चयन के बाद उन्होंने बिहार के गया में शिक्षक की नौकरी छोड़कर झारखंड सचिवालय में योगदान दिया था।उन्होंने बताया कि भर्ती का परिणाम आने के बाद उनके मन में नियुक्ति को लेकर कुछ शंकाएं थीं, लेकिन 5 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा भर्ती रद्द न करने का फैसला आने के बाद उन्होंने 8 जनवरी को अपनी शिक्षक की नौकरी से इस्तीफा दे दिया।अब उनका कहना है कि दूसरी सरकारी भर्ती परीक्षाओं में शामिल होने की उनकी उम्र सीमा भी पार हो चुकी है। ऐसे में नौकरी रद्द होने की स्थिति में उनके सामने नया रोजगार पाने का रास्ता बेहद मुश्किल हो जाएगा।उन्होंने कहा कि अगर सरकार को भर्ती रद्द करनी ही थी तो उन्हें पहले ही इसका फैसला करना चाहिए था। नौकरी के भरोसे दूसरी नौकरी छोड़ने के बाद अब वह खुद को ऐसी स्थिति में पा रहे हैं जहां न पुरानी नौकरी बची और न नई नौकरी का भरोसा है।
‘मुझे खैरात में नहीं मिली नौकरी’
कोडरमा निवासी संदीप यादव भी नियुक्ति रद्द होने के फैसले से परेशान हैं। वह निगरानी विभाग में कार्यरत थे और प्रोजेक्ट भवन स्थित कार्यालय में काम कर रहे थे।संदीप के अनुसार, मंगलवार को जब वह कार्यालय पहुंचे तो गार्ड ने उनका आईडी कार्ड देखने के बाद उन्हें अंदर जाने की अनुमति नहीं दी। उनका कहना है कि उन्होंने परीक्षा पास करने के बाद पिछले साल नौकरी ज्वाइन की थी और यह नौकरी उन्हें किसी की खैरात में नहीं मिली थी।
उन्होंने सरकार पर छात्रों के दबाव में फैसला लेने का आरोप लगाते हुए कहा कि अब उनके सामने भविष्य को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।
‘शादी पर पड़ेगा असर’
संदीप यादव की शादी को अभी सिर्फ दो महीने हुए हैं। नौकरी जाने के डर ने उन्हें व्यक्तिगत जीवन को लेकर भी परेशान कर दिया है।उन्होंने अपनी पत्नी से कहा कि उन्होंने उनसे इसलिए शादी की थी क्योंकि उनके पास अच्छी नौकरी थी। अब अगर नौकरी नहीं रही तो वह चाहें तो इस रिश्ते को खत्म कर सकती हैं।
संदीप का यह बयान बताता है कि परीक्षा रद्द होने का असर केवल रोजगार तक सीमित नहीं है, बल्कि चयनित अभ्यर्थियों के पारिवारिक और निजी जीवन पर भी गहरा असर पड़ने की आशंका है।
परिवार के अकेले कमाने वाले हैं ललन पांडे
देवघर निवासी ललन पांडे का चयन सहायक अनुभाग अधिकारी यानी ASO के पद पर हुआ था और उनकी पोस्टिंग जमशेदपुर में थी।ललन अपने परिवार के अकेले कमाने वाले सदस्य हैं। उनके परिवार में माता-पिता, पत्नी और दो बच्चे हैं। उनका कहना है कि वह अब दूसरी भर्ती परीक्षाओं में शामिल होने की उम्र सीमा पार कर चुके हैं।नौकरी जाने की स्थिति में बच्चों की पढ़ाई और परिवार के खर्च को लेकर उन्हें चिंता सता रही है। उन्होंने इस फैसले को अपने लिए बेहद अन्यायपूर्ण बताया।
एक तरफ आंदोलन की जीत, दूसरी तरफ चयनितों की चिंता
JSSC-CGL और अन्य परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्र करीब एक महीने से आंदोलन कर रहे थे। धरना, भूख हड़ताल और लगातार विरोध के बाद सरकार ने परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया।हालांकि, इस फैसले ने उन अभ्यर्थियों के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है जो परीक्षा प्रक्रिया पूरी कर चयनित हुए और नौकरी भी ज्वाइन कर चुके थे।अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकार चयनित और नियुक्त हो चुके करीब 2,000 अभ्यर्थियों के भविष्य को कैसे सुरक्षित करेगी? वहीं परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच और दोषियों पर कार्रवाई के साथ उन अभ्यर्थियों के लिए क्या रास्ता निकलेगा, यह भी आने वाले दिनों में अहम मुद्दा रहेगा।

