
आस्था, भक्ति और सेवा का संगम: जामसांवली हनुमान लोक में उमड़ा श्रद्धा का सागर ,छ: लाख श्रद्धांलुओं ने किये संकटमोचन के दिव्य दर्शन
संवाददाता धनंजय जोशी
जिला पांढुरना मध्य प्रदेश

हनुमान जन्मोत्सव के पावन अवसर पर जामसांवली स्थित विश्व प्रसिद्ध चमत्कारिक श्री हनुमान मंदिर, हनुमान लोक में आस्था का ऐसा महाकुंभ साकार हुआ, जिसने भक्ति, विश्वास और सेवा की एक अद्भुत मिसाल प्रस्तुत की। आयोजन के अंतिम दिन श्रद्धालुओं का जनसैलाब इस तरह उमड़ा कि पूरा क्षेत्र ‘जय श्रीराम’ और ‘जय हनुमान’ के जयघोष से गूंज उठा। लगभग छह लाख श्रद्धालुओं ने संकटमोचन के चरणों में शीश नवाकर अपनी श्रद्धा अर्पित की। यह दृश्य केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, समर्पण और सेवा का जीवंत उदाहरण बन गया। हर आने वाले भक्त के लिए यह अनुभव दिव्यता और आस्था से परिपूर्ण, जीवनभर याद रहने वाला क्षण बन गया।

इस भव्य आयोजन की शुरुआत जन्मोत्सव की पूर्व संध्या से ही हो गई थी, जब श्रद्धालुओं का सैलाब हनुमान लोक की ओर बढ़ने लगा। प्रशासन और मंदिर ट्रस्ट ने भक्तों की सुविधा के लिए व्यापक इंतजाम किए थे—हर ओर महाप्रसाद, शीतल पेय और शरबत के स्टॉल सेवा भाव की झलक दे रहे थे।

भजन संध्या में प्रसिद्ध गायिका स्वस्ती मेहूल की मधुर स्वर लहरियों ने वातावरण को भक्ति में सराबोर कर दिया। मध्यरात्रि में वाराणसी से आए विद्वान पंडितों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भगवान हनुमान का अभिषेक किया और उसके बाद हुई महाआरती ने पूरे परिसर को अलौकिक आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।

इस आयोजन को और भी विशेष बना दिया पद्मविभूषण तुलसीपीठाधीश्वर जगदगुरु स्वामी रामभद्राचार्य महाराज के सानिध्य ने। उनकी ओजस्वी वाणी में लंका युद्ध के प्रसंग जीवंत हो उठे। उन्होंने रावण के पतन को अहंकार का परिणाम बताते हुए विनम्रता के महत्व को समझाया। श्रीराम कथा के दौरान हनुमान और भरत के मिलन को उन्होंने भक्ति का सर्वोच्च उदाहरण बताया और कहा कि सच्ची भक्ति में केवल प्रेम और निस्वार्थ समर्पण का स्थान होता है।

कथा के दौरान रामराज्य की अवधारणा को भी विस्तार से समझाया गया—एक ऐसा आदर्श समाज जहाँ न्याय, धर्म, करुणा और समानता का वास हो। इस प्रेरणादायी प्रवाह में पूर्व मंत्री श्री नानाभाऊ मोहोड, विधायक श्री परिणय फूके और ट्रस्टी श्री मनोहर शेलकी सहित कई गणमान्य नागरिकों ने सहभागिता की। वहीं हनुमान जी के स्वरूप का वर्णन करते हुए महाराज जी ने उन्हें शक्ति के साथ-साथ विनम्रता और सेवा का प्रतीक बताया। माता सीता के प्रति उनके समर्पण और सिंदूर प्रसंग को प्रेम की पराकाष्ठा बताते हुए उन्होंने कहा कि सच्चा सुख प्रभु स्मरण और दूसरों की सेवा में ही निहित है।
सुव्यवस्थित प्रबंधन और प्रशासनिक दक्षता ने रचा सफलता का नया अध्याय
इतनी विशाल भीड़ के बावजूद हनुमान लोक में अनुशासन और सुव्यवस्था का अद्भुत संतुलन देखने को मिला। स्वयं जगदगुरु रामभद्राचार्य महाराज ने इसकी मुक्तकंठ से सराहना करते हुए आयोजन से जुड़े सभी लोगों के सामूहिक प्रयासों की प्रशंसा की। संस्थान के अध्यक्ष श्री गोपाल शर्मा, कलेक्टर श्री नीरज कुमार वशिष्ठ और प्रबंधकारिणी के सदस्यों सहित सभी स्वयंसेवकों के समर्पण ने इस आयोजन को ऐतिहासिक सफलता प्रदान की।
लाखों श्रद्धालुओं के बीच व्यवस्थाओं को सुचारू बनाए रखना एक बड़ी चुनौती थी, जिसे प्रशासन और पुलिस ने बखूबी निभाया। कलेक्टर पांढुर्णा एवं न्यास प्रबंधक श्री नीरज कुमार वशिष्ठ के नेतृत्व में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) सिद्धार्थ पटेल ने मैदानी मोर्चा संभाला। 5 नायब तहसीलदार, 40 पटवारी और 40 कोटवारों की टीम ने 24 घंटे से अधिक समय तक निरंतर ड्यूटी करते हुए व्यवस्थाओं को सुदृढ़ बनाए रखा।
सुरक्षा व्यवस्था के तहत पुलिस अधीक्षक श्री सुंदर सिंह कनेश के निर्देशन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री नीरज सोनी और एसडीओपी प्रियंका पांडे सहित भारी पुलिस बल पूरी मुस्तैदी से तैनात रहा, जिससे श्रद्धालुओं को सुगम और सुरक्षित दर्शन सुनिश्चित हो सके। अंत में संस्थान के अध्यक्ष गोपाल शर्मा ने इस सफल, सुरक्षित और सुव्यवस्थित आयोजन के लिए जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया।