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सफलता_की_कहानी :घरेलू जिम्मेदारियों से आत्मनिर्भरता तक…

अनारकली तांडेकर बनीं ग्रामीण महिला सशक्तिकरण की मिसाल

सफलता_की_कहानी
घरेलू जिम्मेदारियों से आत्मनिर्भरता तक… अनारकली तांडेकर बनीं ग्रामीण महिला सशक्तिकरण की मिसाल
संवाददाता धनंजय जोशी
जिला पांढुरना मध्य प्रदेश

पांढुरना – कहते हैं अगर संकल्प मजबूत हो और सही मार्गदर्शन मिल जाए, तो कोई भी महिला अपनी पहचान खुद बना सकती है। ऐसा ही प्रेरणादायक उदाहरण बनी हैं ग्राम नांदनवाडी (जिला पांढुर्णा) की निवासी श्रीमती अनारकली तांडेकर, जिन्होंने घरेलू जिम्मेदारियों की सीमाओं को तोड़ते हुए आत्मनिर्भरता की नई राह चुन ली।
स्व-सहायता समूह बना जीवन बदलने का माध्यम
श्रीमती अनारकली तांडेकर वर्तमान में ओम साई स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष के रूप में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने समय पर सही संपर्क और मार्गदर्शन प्राप्त कर अपनी छिपी प्रतिभा को पहचाना और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया।


जनरल स्टोर, बागवानी और सिलाई से बनाई नई पहचान
पहले जहां उनका जीवन सिर्फ घरेलू कार्यों तक सीमित था, वहीं अब अनारकली ने जनरल स्टोर, बागवानी और सिलाई जैसे आयमूलक कार्य प्रारंभ कर एक नई पहचान बनाई है।
₹15,000 से ₹30,000 तक पहुंची मासिक आय
अनारकली की मेहनत और लगन का परिणाम यह रहा कि—
📌 पहले परिवार की मासिक आय लगभग ₹15,000 थी
📌 जो अब बढ़कर करीब ₹30,000 प्रतिमाह हो गई है
यह बदलाव न केवल उनके परिवार के लिए आर्थिक मजबूती लेकर आया, बल्कि पूरे गांव की महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया।
अब दूसरों को भी बना रहीं आत्मनिर्भर
आज अनारकली तांडेकर सिर्फ स्वयं आत्मनिर्भर नहीं हैं, बल्कि आजीविका मिशन के माध्यम से गांव की अन्य महिलाओं को भी स्व-सहायता समूह से जोड़कर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं।


प्रेरणा का संदेश
अनारकली तांडेकर की कहानी यह साबित करती है कि—
“आत्मविश्वास, मेहनत और सही मार्गदर्शन से हर महिला अपने सपनों को साकार कर सकती है।”
उनकी यह सफलता यात्रा आज ग्रामीण महिलाओं के लिए उम्मीद, हौसले और आत्मनिर्भरता की मिसाल बन चुकी है।

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