भीकनगांव (खरगोन): सरकारी योजनाओं में बंदरबांट और कागजी हेरफेर का एक गंभीर मामला जनपद पंचायत भीकनगांव की ग्राम पंचायत बोरुट के ग्राम घोडवा में सामने आया है। यहाँ स्वच्छ भारत मिशन के तहत स्वीकृत सामुदायिक शौचालय को सरकारी दस्तावेजों में ‘बस स्टेशन’ पर निर्मित दर्शाया गया है, ताकि यात्रियों और आम जनता को इसका लाभ मिल सके। लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। नियमों को ताक पर रखकर हुआ निर्माण पंचायत प्रशासन और जिम्मेदारों ने मिलीभगत कर इस शौचालय को बस स्टेशन के बजाय गांव के बीचों-बीच एक रिहायशी इलाके में बना दिया है। इतना ही नहीं, इसे एक विशेष समाज की निजी संपत्ति की तरह उपयोग किया जा रहा है। गांव के बीच में होने के कारण यहाँ से गुजरने वाले राहगीरों और महिलाओं को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है, जबकि बस स्टैंड पर आने वाले यात्री आज भी इस बुनियादी सुविधा के लिए भटक रहे हैं। 181 हेल्पलाइन पर शिकायत करना पड़ा भारी, दबंगों ने घर पहुँचकर दी धमकी हैरानी की बात यह है कि जब ग्रामीण इस भ्रष्टाचार और अव्यवस्था के खिलाफ शासन की ‘181 हेल्पलाइन’ पर शिकायत दर्ज कराते हैं, तो समस्या का समाधान होने के बजाय शिकायतकर्ता की सुरक्षा पर खतरा मंडराने लगता है। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि शिकायत दर्ज होते ही संबंधित लोग और दबंग सीधे घर के सामने आकर खड़े हो जाते हैं। वहां खुलेआम डराने-धमकाने का प्रयास किया जाता है और शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया जाता है।प्रशासन की कार्यप्रणाली और गोपनीयता पर सवालदस्तावेजों में दर्ज स्थान और वास्तविक निर्माण स्थल के बीच का यह अंतर बड़े भ्रष्टाचार की ओर इशारा कर रहा है। सवाल यह भी उठता है कि आखिर शिकायतकर्ता की जानकारी संबंधित पक्ष तक कैसे पहुँच रही है? स्थानीय ग्रामीणों ने अब इस मामले में वरिष्ठ अधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग की है और मांग की है कि दस्तावेजों के अनुसार शौचालय को सार्वजनिक उपयोग के लिए सुलभ कराया जाए और धमकी देने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।