
शिक्षा, समावेशन और शांति संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए भारतीय शिक्षाविद् सिवान बिहार निवासी देशराज विक्रांत, एलएम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानद डॉक्टरेट (Honorary Doctorate in Education) से सम्मानित किया गया है। यह प्रतिष्ठित सम्मान वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ द आर्ट्स, लिटरेचर, एजुकेशन, पीस एंड कल्चर (FEMALPC) एवं यूनिवर्सल डॉक्टोरल कॉलेजिएट काउंसिल ऑफ एक्सीलेंस (CUDOCE) के तत्वावधान में प्रदान किया गया।
यह मानद उपाधि “समावेशन और शांति की संस्कृति” (Inclusion and Culture of Peace) के विशेष फोकस के साथ प्रदान की गई है, जो मानव गरिमा, सामाजिक न्याय, विविधता के सम्मान और वैश्विक भाईचारे को सशक्त बनाने के लिए किए गए कार्यों की अंतरराष्ट्रीय मान्यता है। संस्था द्वारा जारी प्रशस्ति पत्र में शिक्षा, कला, साहित्य और संस्कृति को राष्ट्रों के बीच शांति और समानता के सेतु के रूप में सुदृढ़ करने हेतु उनके प्रयासों की सराहना की गई है।
यह सम्मान 28 जनवरी 2026 को रिपब्लिक ऑफ पेरू में प्रदान किया गया, जो इस उपलब्धि को वैश्विक मंच पर और भी विशिष्ट बनाता है। FEMALPC द्वारा मान्यता प्राप्त यह डॉक्टरेट अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत है, जो उनके कार्यों की विश्वसनीयता और प्रभाव को दर्शाती है।
इस अवसर पर अंतरराष्ट्रीय शिक्षाविदों और संस्था के प्रतिनिधियों ने कहा कि देशराज विक्रांत का कार्य न केवल शिक्षा के क्षेत्र में प्रेरणास्रोत है, बल्कि यह समावेशी समाज और स्थायी शांति की दिशा में वैश्विक प्रयासों को भी मजबूती प्रदान करता है।
यह सम्मान भारत के लिए भी गौरव का विषय है और यह दर्शाता है कि भारतीय शिक्षाविद् वैश्विक स्तर पर मानव मूल्यों और शांति निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

