
जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत नगर व ग्राम स्तर पर संगोष्ठी और जल चौपाल आयोजित, जन-जागरूकता और सामूहिक जिम्मेदारी पर जोर
संवाददाता धनंजय जोशी
जिला पांढुरना मध्य प्रदेश
पांढुर्णा/सौंसर। मध्यप्रदेश शासन के निर्देशानुसार जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत नगर एवं ग्रामीण क्षेत्रों में जन-जागरूकता को बढ़ावा देने हेतु विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में जिला कलेक्टर श्री नीरज कुमार वशिष्ठ एवं जिला समन्वयक श्री अखिलेश जैन के निर्देशन में नगर में जल संगोष्ठी तथा विकासखंड सौंसर के ग्राम खेडी जसोदी में जल चौपाल का सफल आयोजन किया गया।
नगर में आयोजित जल संगोष्ठी में विकासखण्ड समन्वयक श्री दिलीप आठनेरे ने अपने उद्बोधन में जल संकट की आगामी चुनौतियों और समाज के दायित्वों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने स्तर पर जल संरक्षण के लिए कार्य करना होगा, तभी वास्तविक परिवर्तन संभव है। उन्होंने सीएमसीएलडीपी के छात्रों से विशेष रूप से अपील की कि वे अपने चयनित ग्रामों में जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत सक्रिय भूमिका निभाते हुए जन-जागरूकता फैलाएं और विभिन्न गतिविधियों का संचालन करें।

संगोष्ठी में परामर्शदाता श्री राजू वरूड़कर, श्री श्याम दलवी, श्रीमती वर्षा खुरसंगे, नगर विकास प्रस्फुटन समिति के सदस्य श्री पंकज खिरेकर सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
वहीं, विकासखंड सौंसर के हिवरा खंडेराय के आश्रित ग्राम खेडी जसोदी में आयोजित जल चौपाल में ग्रामीणों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया। जिला समन्वयक श्री अखिलेश जैन एवं ब्लॉक समन्वयक श्री अनिल बोबडे के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जल मंदिर प्याऊ एवं जल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना रहा।

चौपाल के दौरान गाँव के तालाब, कुओं एवं हैंडपंपों की स्थिति पर विस्तृत चर्चा की गई तथा जल संरक्षण के विभिन्न उपायों पर जानकारी दी गई। परामर्शदाता श्री सुनील डोंगरे ने वर्षा जल संचयन, सोखता गड्ढा निर्माण एवं ड्रिप सिंचाई के लाभों को विस्तार से समझाया।
कार्यक्रम में परामर्शदाता श्री सुभाष ठाकरे, अखिलेश परिहार, शारदा निकम, नवांकुर संस्था के सचिव श्री गोपाल कोठे, ग्राम सरपंच श्रीमती सुवर्णा धुर्वे, सविता काकड़े, किरण काकड़े सहित बड़ी संख्या में महिलाएं, किसान, युवा एवं बच्चे उपस्थित रहे।
दोनों कार्यक्रमों में जल संरक्षण, जन-जागरूकता और सामूहिक सहभागिता के महत्व पर विशेष जोर दिया गया। इससे न केवल लोगों में जागरूकता बढ़ी, बल्कि उन्हें भविष्य में जल संरक्षण के प्रति सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरणा भी मिली।