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बच्चों को पढ़ने के लिए स्कूल भेजते हैं, न कि मजदूरी कराने के लिए..

सरकारी स्कूल में मिड-डे मील बनाने के लिए छोटे-छोटे बच्चों से लकड़ियां तुड़वाने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल

बच्चों को पढ़ने के लिए स्कूल भेजते हैं, न कि मजदूरी कराने के लिए..

सरकारी स्कूल में मिड-डे मील बनाने के लिए छोटे-छोटे बच्चों से लकड़ियां तुड़वाने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल

जहानाबाद। जिले से शिक्षा व्यवस्था को शर्मसार करने वाला एक मामला सामने आया है, जहां एक सरकारी स्कूल में मिड-डे मील बनाने के लिए छोटे-छोटे बच्चों से लकड़ियां तुड़वाने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। वहीं, अभिभावकों और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। मामला मोदनगंज प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय, मोदनगंज का बताया जा रहा है। वायरल वीडियो में साफ दिख रहा है कि स्कूल की छात्राओं से परिसर में खिड़की-चौखट की लकड़ियां तुड़वाई जा रही हैं। बच्चों से इस तरह का काम करवाना न केवल उनके शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन है, बल्कि सरकारी नियमों के भी खिलाफ है।

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मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब विद्यालय के ही कुछ शिक्षकों ने प्रधानाध्यापक पंकज कुमार सिंह के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। शिक्षकों का आरोप है कि प्रधानाध्यापक का व्यवहार शिक्षकों और बच्चों दोनों के प्रति अनुचित है। उनका कहना है कि कई बार विरोध करने पर उन्हें प्रताड़ित भी किया गया। शिक्षकों ने लिखित शिकायत में यह भी आरोप लगाया है कि मिड-डे मील योजना में अनियमितताएं बरती जा रही हैं। भोजन की गुणवत्ता से समझौता किया जाता है और बच्चों को निर्धारित सुविधाएं नहीं मिलतीं। इधर, वीडियो वायरल होने के बाद अभिभावकों में रोष है। उनका कहना है कि वे अपने बच्चों को पढ़ने के लिए स्कूल भेजते हैं, न कि मजदूरी कराने के लिए। उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। स्थानीय लोगों ने भी घटना की कड़ी निंदा करते हुए प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है।

सोशल मीडिया पर भी यह मामला तेजी से तूल पकड़ रहा है। लोग शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं और दोषियों के खिलाफ उदाहरण पेश करने वाली कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। वहीं, शिक्षा विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दे दिए हैं। हेडमास्टर से स्पष्टीकरण मांगा गया, लेकिन उनका जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया। ऐसे में उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा की गई है। फिलहाल, यह घटना शिक्षा व्यवस्था की खामियों को उजागर करती है। साथ ही, बच्चों के अधिकारों और उनकी सुरक्षा को लेकर भी सवाल उत्पन्न करती है।

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