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डिंडोरी क्रेशर मामले में सम्यक जैन की याचिका पर NGT का एक्शन, जांच टीम गठित

किसलपुरी स्थित क्रेशर का मामला

भोपाल, 9 अप्रैल 2026:

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की भोपाल स्थित केंद्रीय पीठ ने सम्यक जैन द्वारा अधिवक्ता प्रतीक गिरी गोस्वामी के माध्यम से दायर याचिका पर संज्ञान लेते हुए मध्य प्रदेश के डिंडोरी जिले में संचालित एक कथित अवैध स्टोन क्रशर के मामले को गंभीर पर्यावरणीय मुद्दा माना है।

याचिका के अनुसार, किसलपुरी गांव (खसरा नंबर 646 एवं 658) में कृषि भूमि पर बिना वैध भूमि उपयोग परिवर्तन (डायवर्जन) के स्टोन क्रशर संचालित किया जा रहा है। साथ ही, उक्त इकाई के पास वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 तथा जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 के तहत आवश्यक “कंसेंट टू एस्टैब्लिश” और “कंसेंट टू ऑपरेट” जैसी अनिवार्य अनुमतियां नहीं हैं जहां आवश्यक हो, वहां पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत पर्यावरणीय स्वीकृति भी प्राप्त नहीं की गई है।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि इस अनियंत्रित संचालन के कारण क्षेत्र में गंभीर पर्यावरणीय क्षति हुई है। इसमें वायु एवं ध्वनि प्रदूषण, अत्यधिक धूल का उत्सर्जन, आसपास की कृषि भूमि को नुकसान तथा भूजल स्तर पर प्रतिकूल प्रभाव शामिल हैं l इसके साथ ही स्थानीय निवासियों के स्वास्थ्य पर भी गंभीर खतरे की आशंका जताई गई है।

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मामले की गंभीरता को देखते हुए अधिकरण ने कहा कि यह एक महत्वपूर्ण पर्यावरणीय प्रश्न उठाता है। अधिकरण ने यह भी टिप्पणी की कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह ‘प्रिकॉशनरी प्रिंसिपल’ तथा ‘पोल्यूटर पेज प्रिंसिपल’ जैसे स्थापित पर्यावरणीय सिद्धांतों का उल्लंघन है, जो पर्यावरणीय नुकसान को रोकने और प्रदूषक को जवाबदेह ठहराने पर बल देते हैं।अधिकरण ने राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड एवं जिला प्रशासन की भूमिका पर भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में कार्रवाई न करना वैधानिक कर्तव्यों की उपेक्षा माना जा सकता है।

मामले की जांच के लिए अधिकरण ने एक संयुक्त समिति का गठन किया है, जिसमें जिला कलेक्टर डिंडोरी, भूविज्ञान एवं खनन विभाग तथा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रतिनिधि शामिल होंगे। समिति को स्थल निरीक्षण कर छह सप्ताह के भीतर विस्तृत तथ्यात्मक एवं कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

आवेदक को निर्देश दिया गया है कि वह याचिका की प्रतियां सभी प्रतिवादियों एवं समिति को उपलब्ध कराए, जबकि प्रतिवादियों को छह सप्ताह के भीतर ई-फाइलिंग पोर्टल के माध्यम से अपना जवाब दाखिल करना होगा।मामले की अगली सुनवाई 14 जुलाई 2026 को निर्धारित की गई है।

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