

रिपोर्टर दिलीप कुमरावत MobNo 9179977597

मनावर। जिला धार।। सत्य से बड़ा कोई धर्म नहीं और कर्म के बिना जीवन का उद्धार नहीं। इसलिए मानव को निरंतर अच्छे कर्म करना और सत्य के मार्ग पर चलना आवश्यक है। माता पिता की सच्ची सेवा करने से दुखों का नाश होता है। जब कुंडली में राहु केतु प्रबल हो तो काली गाय और काले कुत्ते को रोटी खिलाने से कष्ट दूर हो जाते है तो माता पिता की सेवा करने, भोजन कराने से क्या किसी का उद्धार नहीं होगा? उक्त उदगार ग्राम वायल में आयोजित संकल्पित पंचम श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिन कथा वाचक पंडित प्रवीण शर्मा राधे भैय्या ने व्यक्त कर गोवर्धन पूजा, छप्पन भोग, रासलीला (महाकाव्य), श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह के भावपूर्ण प्रसंगों को सुनाकर अहंकार के नाश और परमात्मा के प्रति समर्पण का दिव्य संदेश दिया। श्रोता भगवान के अलौकिक प्रेम में भक्ति रस में सराबोर होकर भावविभोर हुए। कथा के माध्यम से पर्यावरण सुरक्षा का संदेश भी दिया।

व्यासपीठ से कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने इन्द्र का अहंकार तोड़ने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठ उंगली पर उठाया। गोप-ग्वालों ने 56 प्रकार के भोग लगाकर उत्सव मनाया। महारास में श्रीकृष्ण ने बांसुरी बजाकर गोपियों का आह्वान किया, जो जीवात्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक है। कथा के अंतिम चरण में श्रीकृष्ण और रुक्मिणी जी के विवाह का भव्य और संगीतमय उत्सव मनाया जाता है। श्रीमद् भागवत कथा का छटा दिन भक्तों को गोपियों जैसी निस्वार्थ भक्ति और भगवान के प्रति पूर्ण समर्पण की शिक्षा देता है।

पंडित प्रवीण शर्मा राधे भैय्या ने श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह का प्रसंग सुनाते हुए महा रास के पांच अध्याय का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि महारास में गाये जाने वाले पंच गीत श्रीमद् भागवत के पंच प्राण हैं जो भी ठाकुरजी के इन पांच गीतों को भाव से गाता है वह भव पार हो जाता है। उन्हें वृंदावन की भक्ति सहज प्राप्त हो जाती है। कथा मे महर्षि संदीपनी के आश्रम में विद्या ग्रहण करना, उधव गोपी संवाद, ऊधव द्वारा गोपियों को अपना गुरु बनाना, द्वारका की स्थापना एवं रुक्मणी विवाह के प्रसंग का संगीतमय भावपूर्ण पाठ किया गया।

कथा के दौरान व्यासपीठ से कहा कि महारास में भगवान श्रीकृष्ण ने बांसुरी बजाकर गोपियों का आह्वान किया और महारास लीला के द्वारा ही जीवात्मा परमात्मा का ही मिलन हुआ। जीव और ब्रह्म के मिलने को ही महारास कहते है। श्रीकृष्ण और रुक्मणी के विवाह की झांकी ने सभी भक्तों को आनंदित किया। पंडित प्रवीण शर्मा राधे भैया ने कहा कि जो भक्त ईश्वर प्रेम में आनंदित होते हैं और श्रीकृष्ण-रूक्मिणी के विवाह में शामिल होते हैं, उनकी समस्याएं समाप्त हो जाती हैं। 
इस अवसर पर रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। जिसमें भारी तादाद में स्वेच्छा से रक्त दान किया गया तथा छठे दिन की कथा की पूर्व संध्या पर भजन संध्या और सुंदरकांड का भव्य आयोजन कथा पंडाल में किया गया।