
*महिला कृषक ने प्राकृतिक खेती से बढ़ाई आय, किसान कल्याण वर्ष के संकल्प को किया साकार*
संवाददाता धनंजय जोशी
जिला पांढुरना मध्य प्रदेश
*प्राकृतिक खेती अपनाकर लागत में 50% कमी और आय में वृद्धि*
*प्राकृतिक खेती से डेढ़ लाख तक लाभ, अन्य किसानों के लिए बनी प्रेरणा*
पांढुरना -मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाते हुए किसानों की आय में वृद्धि, लागत में कमी तथा प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने की दिशा में विशेष अभियान चलाया जा रहा है। मध्य प्रदेश सरकार का उद्देश्य है कि प्रत्येक किसान टिकाऊ खेती पद्धतियों को अपनाकर आत्मनिर्भर एवं समृद्ध बने। इसी संकल्प को साकार करते हुए पांढुर्णा जिले के पांढुर्णा विकासखंड के ग्राम गोरलीखापा की महिला कृषक श्रीमती उमा डांगे ने प्राकृतिक खेती अपनाकर आय में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है। श्रीमती उमा डांगे जैसे महिला कृषकों के प्रयास शासन की योजनाओं का लाभ लेकर किसान कल्याण की भावना को जमीनी स्तर पर साकार कर रहे हैं।

श्रीमती उमा डांगे पूर्व में रासायनिक पद्धति से खेती करती थीं। गेहूं, चना और मक्का जैसी फसलों में बीज, उर्वरक एवं कीटनाशकों पर प्रति एकड़ अधिक लागत आती थी। लगातार बढ़ती लागत और भूमि की गिरती उर्वरा शक्ति से वह चिंतित थीं। कृषि विभाग की सलाह पर उन्होंने प्राकृतिक खेती में रुचि दिखाई और इसे अपनाने तथा व्यवहार में लाने का निर्णय लिया।
उन्होंने शुरुआत में आधा एकड़ क्षेत्र में प्राकृतिक पद्धति से खेती करने का निर्णय लिया। आत्मा परियोजना के अधिकारियों द्वारा बताई गई पद्धतियों के अनुसार उन्होंने जीवामृत, निर्मास्त्र, घनजीवामृत, दसपर्णी अर्क आदि का उपयोग फसलों पर करना शुरू किया। प्रथम बार के उपयोग से ही उन्हें अच्छे परिणाम मिले और लागत में लगभग 50 प्रतिशत तक कमी आई।
इसके साथ ही उन्होंने गुलाब के 250 पौधे लगाए, जिनमें प्राकृतिक विधि का उपयोग किया गया। इससे उन्हें अच्छी गुणवत्ता के फूल प्राप्त हो रहे हैं। श्रीमती डांगे ने बताया कि वे गेहूं, चना और अरहर फसलों में भी प्राकृतिक पद्धति का उपयोग कर रही हैं, जिससे लागत में 50 प्रतिशत तक कमी आई है और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन प्राप्त हो रहा है।
लाभ एवं अन्य किसानों के लिए प्रेरणा
श्रीमती उमा डांगे के अनुसार प्राकृतिक खेती अपनाने से उनकी लागत में 50 प्रतिशत तक कमी आई है तथा मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी बढ़ी है। इसके साथ ही उन्हें गुणवत्तापूर्ण और पौष्टिक उत्पादन प्राप्त हो रहा है। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक खेती से रसायन मुक्त अनाज एवं सब्जियां मिल रही हैं, जो स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक हैं।
एक एकड़ खेत से उन्हें लगभग डेढ़ लाख रुपये तक का लाभ प्राप्त हो रहा है। उमा डांगे अपने आसपास के किसानों को जीवामृत, निर्मास्त्र और दसपर्णी अर्क बनाने एवं उपयोग करने की पूरी विधि बता रही हैं तथा किसानों और महिलाओं को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं। उनके प्रयास अन्य किसानों के लिए भी एक प्रेरणादायक उदाहरण बन रहे हैं।