

हमीरपुर से ब्यूरो चीफ राजकुमार की रिपोर्ट
सुमेरपुर हमीरपुर । माहे रमजान रहमतों और बरकतों का पाक महीना है, जिसमें इबादत का सवाब कई गुना बढ़ जाता है। मौलाना रियाजुल हसन ने बताया कि हदीसों में आया है कि इस मुकद्दस महीने में अल्लाह तआला रोज़ेदारों के लिए विशेष इनाम मुकर्रर फरमाते हैं और सुबह से शाम तक फरिश्ते उनके लिए दुआ-ए-मग़फिरत करते रहते हैं। रमजान में रखा गया रोज़ा केवल भूखा-प्यासा रहने का नाम नहीं, बल्कि यह इंसान को बुराइयों से बचाने वाली एक मजबूत ढाल है।
इस्लामी रिवायतों के मुताबिक रोज़ा जहन्नम की आग और अजाब से हिफाज़त करता है। क़यामत के दिन रोज़ेदारों को अल्लाह की खास पहचान मिलेगी और उन्हें अजाब से दूर रखा जाएगा। कहा गया है कि जब गुनहगारों को जहन्नम में डाला जाएगा, तो आग रोज़ेदारों को नहीं छुएगी, क्योंकि उनके मुंह से रोज़े की खुशबू आएगी। यही वजह है कि रमजान में सब्र, संयम और नेक अमल की अहमियत और बढ़ जाती है।
उलेमाओं का कहना है कि रमजान आत्मसंयम, भाईचारे और इबादत का महीना है। इस महीने में कुरआन की तिलावत, नमाज़, सदक़ा और जरूरतमंदों की मदद का खास सवाब मिलता है। रोज़ा इंसान को नफ्स पर काबू सिखाता है और समाज में अमन व भाईचारे का पैगाम देता है। इसलिए हर मुसलमान को चाहिए कि वह रमजान की कद्र करे और नेक रास्ते पर चलते हुए इस महीने की बरकतों से फायदा उठाएं।

