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प्राकृतिक खेती ने बदली तकदीर: कृषक यादोराव भादे बने आत्मनिर्भरता की मिसाल 

पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर प्राकृतिक खेती और नर्सरी उद्यम से आय में किया दोगुना से अधिक इजाफा

प्राकृतिक खेती ने बदली तकदीर: कृषक यादोराव भादे बने आत्मनिर्भरता की मिसाल 

संवाददाता धनंजय जोशी

जिला पांढुरना मध्य प्रदेश

पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर प्राकृतिक खेती और नर्सरी उद्यम से आय में किया दोगुना से अधिक इजाफा
पांढुर्णा/पिपलपानी। ग्राम पिपलपानी (विकासखण्ड पांढुर्णा) के कृषक श्री यादोराव भादे ने यह साबित कर दिया है कि यदि किसान आधुनिक सोच, मेहनत और नवाचार के साथ आगे बढ़े तो खेती घाटे का नहीं बल्कि लाभ का व्यवसाय बन सकती है। पारंपरिक खेती से संघर्ष कर रहे यादोराव भादे ने प्राकृतिक खेती और नर्सरी उद्यम को अपनाकर अपनी आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि की है।
पहले वे कपास और अरहर की पारंपरिक खेती पर निर्भर थे, जिससे उनकी वार्षिक आय लगभग ₹1 से ₹1.50 लाख तक सीमित रहती थी। लेकिन आज वे प्राकृतिक खेती, नर्सरी उत्पादन और जैविक हॉट बाजार से जुड़कर लगभग ₹3.10 लाख वार्षिक शुद्ध आय अर्जित कर रहे हैं।

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आत्मा परियोजना का मार्गदर्शन बना सफलता की कुंजी
कृषि विभाग की आत्मा परियोजना के मार्गदर्शन में उन्होंने रासायनिक खाद एवं कीटनाशकों पर निर्भरता कम कर जैविक और प्राकृतिक संसाधनों से खेती की दिशा बदल दी। उन्होंने स्वयं जीवामृत, बीजामृत, घनजीवामृत, दशपर्णीय अर्क और नीमास्त्र तैयार कर खेती की लागत घटाई और उत्पादन क्षमता बढ़ाई।


सब्जियों से लेकर मसालों तक, खेती में किया विस्तार
प्राकृतिक खेती के माध्यम से उन्होंने गेहूं, चना जैसी फसलों के साथ-साथ टमाटर, मिर्च, बैंगन, हल्दी जैसी नकदी फसलों का भी उत्पादन शुरू किया। इसके साथ ही उन्होंने नेट हाउस नर्सरी विकसित कर पौध तैयार करने का कार्य भी शुरू किया, जिससे अतिरिक्त आय का मजबूत स्रोत बना।


बढ़ी भूमि की उपजाऊ शक्ति, किसानों के लिए बने प्रेरणा स्रोत
प्राकृतिक खेती अपनाने से उनकी भूमि की उपजाऊ क्षमता में लगातार सुधार हो रहा है। आज आसपास के कई किसान उनकी सफलता देखकर प्रेरित हो रहे हैं और प्राकृतिक खेती की ओर कदम बढ़ा रहे हैं।
प्रेरणा देने वाली कहानी
कृषक यादोराव भादे की यह सफलता कहानी बताती है कि प्राकृतिक खेती केवल पर्यावरण हितैषी नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से भी लाभकारी है। सही मार्गदर्शन और मेहनत से किसान अपनी खेती को टिकाऊ, सुरक्षित और आत्मनिर्भर बना सकता है।
यह कहानी हर किसान के लिए संदेश है—”बदलाव अपनाइए, खेती को लाभ का साधन बनाइए!”

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