

हमीरपुर से ब्यूरो चीफ राजकुमार की रिपोर्ट
मौदहा हमीरपुर। मुस्लिम समुदाय का महत्वपूर्ण त्यौहार शब ए बारात मंगलवार को मनाया जायेगा जिसके चलते मुस्लिम समुदाय के बुजुर्गो से लेकर बच्चे तक अपने पूर्वजों की कब्रिस्तान में साफ सफाई और पुताई कर रहे हैं वहीं सामूहिक कब्रगाहों में नगरपालिका द्वारा बिजली और सफाई के साथ मिट्टी डलवाने का काम शुरू कर दिया गया है। शब ए बारात को लेकर मुस्लिम धर्म गुरु कारी अताउरर्हमान कादरी ने बताया कि रजब और रमजान का दरम्यानी महीना शाबान अल्लाह के रसूल का महीना है। और रमजान उम्मत ए मोहम्मदिया का महीना है। अल्लाह के रसूल रजब, शाबान और रमजान में रोजा रखते थे। जिसमे रमजान के रोजा फर्ज हैं। जो शख्स शब ए बारात बाद नमाज़ मगरिब पानी में बेरी का सात पत्ती डालकर इबादत की नियत से गुस्ल करे तो अल्लाह उसके जिस्म की तमाम बीमारियों को दूर करता है।और इशा की नमाज़ के बाद अपने पूर्वजों की कब्रों पर जाए लेकिन अगरबत्ती कब्रों से दूर हटकर लगाएं। कब्र पर आग जलाना सख्त मना है। और कब्रों पर फूल डालें लेकिन आतिशबाजी करना सख्त मना है। इस पर अपने बच्चों को ताकीद फरमाएं।
वहीं मुस्लिम धर्म गुरु और शहर इमाम करामत उल्लाह ने शब ए बारात के सम्बन्ध में बताया कि,यह रात शाबान महीने की 14 तारीख को सूर्यास्त के बाद शुरू होती है। मुसलमानों के लिए यह रात बेहद फज़ीलत(महिमा) की रात मानी जाती है, इस दिन विश्व के सारे मुसलमान अल्लाह की इबादत करते हैं। वे दुआएं मांगते हैं और अपने गुनाहों की तौबा करते हैं। जिसमें सच्चे मन से तौबा करने वालों के गुनाह माफ कर दिए जाते हैं।शब-ए-बारात की हदीस के अनुसार, पैगंबर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) शब-ए-बारात के दिन मदीना के अल-बक़ी कब्रिस्तान में गए थे। उन्होंने वहाँ दफ़न सभी मुसलमानों की आत्माओं के लिए दुआ की थी, और इसी कारण मुसलमान इस रात अपने प्रियजनों की कब्रों पर जाकर उनकी आत्माओं की शांति और क्षमा के लिए प्रार्थना करते हैं। अगले दिन का रोजा: शब-ए-बारात की रात के बाद, अगले दिन (15 शाबान) को रोजा (उपवास) रखना भी सवाब का काम माना जाता है।