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विदेशी श्रद्धालुओं व इस्कान की ब्रज 84 कोस की यात्रा का कामवन में पदार्पण

विदेशी श्रद्धालुओं व इस्कान की ब्रज 84 कोस की यात्रा का कामवन में पदार्पण

संवाददाता मनमोहन गुप्ता कामां डीग

कामां – इस्कान की ब्रज 84 कोस यात्रा का कामवन में  आगमन हुआ !
श्रीकृष्ण संकीर्तन के साथ नाचते गाते विदेशी भक्तों को देखने लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा ।सभी ने तीर्थराज विमलकुण्ड की परिक्रमा कर स्नान व आचमन किये। मुख्य मन्दिर विमल बिहारी क़े दर्शन व पूजन किये।
ब्रज धाम की महिमा का वर्णन करते हुए श्री विमल बिहारी के सेवायत संजय लवानियां ने बताया कि श्रीकृष्ण नेअपनी 84 उंगलियों के आकार में रज लिया। यह रज 84 कोस (252 किलोमीटर) के क्षेत्र में यमुना नदी में फैली है। बिरिजा नदी और गोलोक धाम के रज के मिश्रण के स्वरुप में इसका नाम ‘ब्रज’ रखा गया।
इस क्षेत्र में 12 वन, 24 उपवन, 20 कुंड और गांव अर्थात् नंदगांव, बरसाना, गोवर्धन, वृंदावन, मथुरा,कामवन , कोसी, राधा कुंड आदि हैं। ब्रज के निर्माण के बाद भगवान कृष्ण ने गोलोक धाम में सभी वृक्षों, पक्षियों आदि को भी ब्रज में आने के लिए अनुरोध किया। इस प्रकार ब्रज ने इस मृत्युलोक में गोलोक धाम से अवतरण लिया । स्कंद पुराण क़े अनुसार तीर्थराज विमल कुण्ड में स्नान करने से सभी पापों से मुक्ति होती है। जो इस कुण्ड पर देह त्याग करता है उसे श्री कृष्ण का लोक प्राप्त होता है।इसके दर्शनार्थ भारत क़े ही नहीं अपितु देशी विदेशी लोग भी वर्षभर आते हैं।
ब्रजयात्रा में अमेरिका ,कनाडा ,फ्रांस ,मलेशिया ,रूस ,
श्रीलंका ,मालदीव ,बांग्लादेश ,आस्ट्रेलिया सहित अनेकों विदेशी भक्तजन भाग ले रहे हैं ।

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