
चंडीगढ़ में गोवंश से जुड़े सनसनीखेज मामलों ने शहर की कानून व्यवस्था और प्रशासनिक चौकसी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विश्व हिंदू परिषद (पंजाब प्रांत) के पूर्व सोशल मीडिया प्रभारी महंत मनोज शर्मा ने इस मामले को लेकर सीधे केंद्र सरकार का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर इस पूरे प्रकरण की केंद्रीय एजेंसी से जांच कराने की मांग की है।
घटनाक्रम: लापरवाही या संगठित अपराध?
महंत मनोज शर्मा ने अपने पत्र में सिलसिलेवार घटनाओं का जिक्र करते हुए इसे एक बड़ी साजिश करार दिया है:
- गोशाला में मौतें: चंडीगढ़ की गोशालाओं में भारी संख्या में गोवंश का मृत पाया जाना और अवशेषों का गायब होना।
- 15 जनवरी की घटना: बापूधाम, शास्त्री नगर और मनीमाजरा जैसे अलग-अलग थाना क्षेत्रों में एक ही दिन गोवंश के कटे हुए अंग और कंकाल मिलना।
- प्रशासनिक मिलीभगत का आरोप: महंत ने स्पष्ट कहा कि तीन अलग-अलग थाना क्षेत्रों में एक साथ ऐसी घटना होना बिना प्रशासनिक संरक्षण के मुमकिन नहीं है।
“अवैध दूध व्यापार और कमजोर जांच” पर उठाए सवाल
पत्र में आरोप लगाया गया है कि चंडीगढ़ में गोमाता, भैंस और बकरी के दूध का अवैध कारोबार लंबे समय से फल-फूल रहा है। महंत मनोज शर्मा के अनुसार, जब भी गोवंश से जुड़े अवैध मामले सामने आते हैं, तो जांच को जानबूझकर कमजोर कर दिया जाता है ताकि मुख्य दोषियों को बचाया जा सके।
”यह केवल लापरवाही का मामला नहीं, बल्कि एक संगठित अपराध है। बिना प्रशासनिक मिलीभगत के शहर की सड़कों पर गोवंश के अवशेष मिलना असंभव है।” — महंत मनोज शर्मा
केंद्र सरकार से प्रमुख मांगें:
महंत मनोज शर्मा ने केंद्र से हस्तक्षेप की अपील करते हुए निम्नलिखित मांगें रखी हैं:
- CBI जांच: पूरे मामले की निष्पक्ष जांच CBI या किसी अन्य केंद्रीय एजेंसी से कराई जाए।
- उच्चस्तरीय समिति: एक विशेष जांच समिति का गठन हो, जिसमें उन्हें (महंत मनोज शर्मा) भी शामिल किया जाए ताकि जमीनी तथ्यों को रखा जा सके।
- कठोर कार्रवाई: दोषी अधिकारियों और अपराधियों पर ऐसी कार्रवाई हो जो मिसाल बने।
निष्कर्ष
इस घटनाक्रम ने न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर गोवंश सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। अब सभी की नजरें केंद्र सरकार के रुख पर टिकी हैं कि क्या इस मामले में कोई बड़ी कार्रवाई होती है या नहीं।
