
हिंदी माथे की बिंदी है
इस बिंदी में हमारी संस्कृति है
हमारी सभ्यता है हमारी प्रकृति है।
हिंदी हमारी भावनाओं का सागर है।
हिंदी हमारा इतिहास है हमारा भूगोल है और हमारे पुण्य विचारों की गागर है।
हिंदी हमारा पोरस है, हमारा हिमालय जैसा संस्कार है, ।
हिंदी पावन गंगा जमुना नर्मदा से ऊर्जस्वित गुणों की धार है।
हिंदी राम कृष्ण का गान है।
हिंदी चंद्रगुप्त विक्रमादित्य अशोक महान है।
हिंदी सूर तुलसी मीरा की साधना है।
हिंदी पंत निराला दिनकर की भावना है।
हिंदी जन-जन के मन की थाती है।
हिंदी श्रेयस्कर सर्व पूजित भारत की माटी है।
अंजीव अंजुम
