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दादागुरु भगवान की आज्ञा को शिरोधार्य कर, दो नव युगल जोड़े” विवाहोत्तर काल 01/11/2025 में ही संपन्न कर 05/11/2025पावन माँ नर्मदा की परिक्रमा को चल पड़े

“दादागुरु भगवान की आज्ञा को शिरोधार्य कर, दो नव युगल जोड़े” विवाहोत्तर काल 01/11/2025 में ही संपन्न कर 05/11/2025पावन माँ नर्मदा की परिक्रमा को चल पड़े

 

राहुल सेन मांडव

मो 9669141814

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मांडू न्यूज/यह दृश्य इस भूमंडल पर प्रथम बार प्रकट हुआ, जहाँ गृहस्थ जीवन का आरंभ भोग-विलास अथवा प्रमाद से नहीं, अपितु गुरु-आज्ञा, संयम और धर्माचरण से सुशोभित हुआ। दादागुरु की वाणी को जीवन का पाथेय मानकर, इन नवयुगल जोड़ों ने एक नवीन परंपरा की नींव रखी, जो भविष्य में अवश्य ही विराट परंपरा का रूप लेगी और जो कालांतर में लोकजीवन को दिशा देगी।

आज के समय में लोग विवाह के उपरांत अनुशासन को विस्मृत कर, इधर-उधर भ्रमण और मनोरंजन में प्रवृत्त हो जाते हैं, मानो मर्यादा का बंधन शेष ही न रहा हो। परंतु इन जोड़ों को देखो—इन्होंने इस सदी में गुरु-आज्ञा मर्यादा का सजीव स्वरूप प्रस्तुत कर दिया। इनके नव विवाह, मर्यादित जीवन से उठी धूल भी साधना बन गई और इनका आचरण जनमानस के लिए प्रेरणा का दीपक हो गया।

यह प्रसंग हमें यह बोध कराता है कि विवाह केवल सांसारिक रीति नहीं, अपितु धर्म-पथ पर अग्रसर होने का प्रथम चरण है। जहाँ गुरु की आज्ञा सर्वोपरि होती है, वहीं जीवन सफल और सार्थक होता है। आओ, इस आदर्श को हृदय में धारण करें और जानें कि श्रद्धा से युक्त आचरण ही सच्चा उत्सव है। यही मर्यादा, यही साधना, और यही नवयुग का मंगल संदेश है।

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