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मनोज पटेल के विरुद्ध कठोर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?

सरायपाली के आम आदमी और सेजेस में पढ़ने वाले हर बच्चे के आम पालक के मन में एक ही सवाल गूंज रहा है — आखिर मनोज पटेल के खिलाफ अब तक कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई है? क्या बाहुबली मनोज पटेल के खिलाफ कार्रवाई करने से डर रहे अधिकारी?? 16 अक्टूबर 2024 को मूल शाला वापसी का आदेश जारी होने के बावजूद मनोज पटेल ने न केवल आदेश का पालन नहीं किया, बल्कि स्थानांतरण के बाद भी नये प्राचार्य को प्रभार सौंपने से साफ इनकार किया है। इस मामले में कई गंभीर आरोप और काले कारनामे सामने आए हैं, फिर भी अधिकारी मौन साधे हुए हैं।

आदेश का उल्लंघन और प्रभार न सौंपना
मनोज पटेल ने स्थानांतरण के बाद भी अपने कर्तव्यों का निर्वहन नहीं किया और नये प्राचार्य को प्रभार सौंपने से मना कर दिया। यह न केवल प्रशासनिक नियमों का उल्लंघन है, बल्कि इससे शैक्षणिक व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है। प्राचार्य को आदेश लेने से रोकना और फोन पर गाली-गलौज करना एक गंभीर अनुशासनहीनता है, जो किसी भी सरकारी कर्मचारी के लिए अस्वीकार्य है।

मेडिकल लगाकर परिदृश्य से गायब
आदेश के बाद मनोज पटेल ने मेडिकल का सहारा लेकर खुद को परिदृश्य से गायब कर लिया है। यह एक तरह से प्रशासनिक आदेशों की अवहेलना है और इसे परोक्ष रूप से मीडियाबाजी के माध्यम से दबाने की कोशिश भी माना जा सकता है। इस तरह की हरकतें न केवल विभाग की छवि को नुकसान पहुंचाती हैं, बल्कि अन्य कर्मचारियों के लिए भी गलत संदेश देती हैं।

छोटे कर्मचारियों पर तत्काल कार्रवाई, मनोज पटेल पर क्यों नहीं?
यहां एक बड़ा विरोधाभास सामने आता है। विभाग छोटे कर्मचारियों के प्रति बेहद सख्त और तत्काल कार्रवाई करता है, लेकिन मनोज पटेल जैसे वरिष्ठ या प्रभावशाली व्यक्ति के मामले में इतनी अनुशासनहीनता के बावजूद कार्रवाई से क्यों पीछे हट रहा है? क्या विभाग भी व्यक्ति देखकर पक्षपातपूर्ण व्यवहार करता है? क्या विभाग की नियमावली में ऐसा कोई प्रावधान है जो कुछ कर्मचारियों को विशेष छूट देता हो? या फिर यह केवल मनोज पटेल के लिए ही एक विशेष सहूलियत है? ये सवाल प्रशासन की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाते हैं।

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अनगिनत काले कारनामे और सवालों के घेरे में मनोज पटेल
सरायपाली में मनोज पटेल के खिलाफ कई बार शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं, जिनमें उनके काले कारनामों का जिक्र है। बावजूद इसके, अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। आम जनता और पालक वर्ग का मानना है कि यदि मनोज पटेल की जगह कोई छोटा कर्मचारी होता, तो शायद आदेश की अवमानना को हथियार बनाकर उसे निलंबित कर दिया जाता।

क्या है सेटिंग?
यह सवाल हर उस व्यक्ति के मन में उठता है जो इस मामले से परिचित है। क्या मनोज पटेल के खिलाफ कार्रवाई न होने के पीछे कोई राजनीतिक या प्रशासनिक सेटिंग है? क्या उनके संरक्षण में कोई बड़ा अधिकारी है जो उन्हें बचा रहा है? ये सवाल न केवल प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हैं, बल्कि जनता के विश्वास को भी कमजोर करते हैं।

सरायपाली के आम लोग, सेजेस के बच्चे और उनके पालक इस मामले में न्याय की उम्मीद कर रहे हैं। मनोज पटेल के खिलाफ कार्रवाई न होना प्रशासनिक लापरवाही और अनियमितता को दर्शाता है। ऐसे में आवश्यक है कि संबंधित अधिकारी जल्द से जल्द इस मामले की गंभीरता को समझें और उचित कार्रवाई करें ताकि शिक्षा व्यवस्था प्रभावित न हो और प्रशासनिक अनुशासन कायम रहे।

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