

पूर्व प्रभारी प्राचार्य मनोज पटेल की तानाशाही: स्थानांतरण के 24 दिन बाद भी नहीं सौंपा प्रभार
शिक्षा क्षेत्र में अनुशासन और प्रशासनिक जवाबदेही की अनदेखी का एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां पूर्व प्रभारी प्राचार्य मनोज पटेल ने अपने स्थानांतरण के बावजूद 24 दिन बीत जाने के बाद भी नए प्राचार्य प्रदीप सेठ को प्रभार सौंपने से इनकार कर दिया है। इस घटना ने विद्यालय के सुचारू संचालन को बाधित कर दिया है और शिक्षा विभाग में मनोज पटेल की तानाशाही की छवि को और अधिक गहरा कर दिया है।
मामले की पृष्ठभूमि यह है कि मनोज पटेल को उनके विरुद्ध हुए अपने शिकायत के बाद उनके पद से स्थानांतरित कर दिया गया था, लेकिन उन्होंने अपने पद का प्रभार नए अधिकारी को सौंपने में देरी की। इस देरी के कारण विद्यालय में प्रशासनिक कार्यों में बाधा उत्पन्न हुई है। शिक्षक, छात्र और अभिभावक इस स्थिति से काफी परेशान हैं क्योंकि विद्यालय का दैनिक क्रियाकलाप प्रभावित हो रहा है।
सूत्रों के अनुसार, मनोज पटेल की इस तानाशाही रवैये के पीछे व्यक्तिगत स्वार्थ और अनधिकृत प्रशासनिक नियंत्रण बनाए रखने की इच्छा है। उन्होंने प्रभार सौंपने के लिए आवश्यक औपचारिकताएं पूरी नहीं कीं, जिससे नए प्राचार्य को अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने में कठिनाई हो रही है। इस स्थिति ने विद्यालय के माहौल को तनावपूर्ण बना दिया है।
विद्यालय के अन्य कर्मचारियों ने भी इस मामले में अपनी चिंता व्यक्त की है। मनोज पटेल का यह आपत्तिजनक व्यवहार घोर अनुशासनहीनता को बढ़ावा देता है और शिक्षा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता पर सवाल उठाता है साथ ही उनके तथाकथित अनुशासन प्रिय होने के स्वांग की सच्चाई भी उजागर करता है। उन्होंने शिक्षा विभाग से तत्काल हस्तक्षेप कर इस समस्या का समाधान करने की मांग की है।
इस घटना ने शिक्षा प्रशासन में सुधार की आवश्यकता को भी उजागर किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में मनोज पटेल के विरुद्ध त्वरित और कड़े कदम उठाने चाहिए ताकि शिक्षा संस्थानों में अनुशासन और जवाबदेही बनी रहे। साथ ही, स्थानांतरण के बाद प्रभार सौंपने की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाया जाना चाहिए।
अंततः, यह मामला शिक्षा विभाग के लिए एक चेतावनी है कि प्रशासनिक तानाशाही और व्यक्तिगत स्वार्थ को शिक्षा के हितों पर हावी नहीं होने दिया जाना चाहिए। विद्यालयों में सुचारू संचालन और गुणवत्ता शिक्षा के लिए सभी अधिकारियों को अपने कर्तव्यों का निर्वहन ईमानदारी और समयबद्धता से करना आवश्यक है।