

शिवम सादक जी महाराज वृन्दावन क़े पावन सानिध्य में कामवन दर्शन को आये सैकड़ों श्रद्धालु
रिपोर्टर मनमोहन गुप्ता कामां डीग 9783029649
कामां- कृष्ण धर्मावलंबियों ने कामवन क़े मुख्य मन्दिर विमल बिहारी के दर्शन व पूजन कर तीर्थराज क़े आचमन व परिक्रमा की। मन्दिर विमल बिहारी के सेवाअधिकारी संजय लवानिया ने कामवन माहात्म्य सुनाते हुए बताया कि
एक समय कृष्ण गोचारण करते हुए यहाँ उपस्थित हुए । चारों तरफ वन में बड़ी–बड़ी हरी–भरी घासें थीं । गऊ आनन्द से वहाँ चरने लग गई । श्रीकृष्ण निश्चिन्त होकर सखाओं के साथ मेष(भेड़)चोरी की लीला खेलने लगे । बहुत से सखा भेड़ें बन गये और कुछ उनके पालक बने । कुछ सखा चोर बनकर भेड़ों को चुराने की क्रीड़ा करने लगे । कृष्ण विचारक (न्यायाधीश) बने । मेष पालकों ने न्यायधीश कृष्ण के पास भेड़ चोरों के विरुद्ध मुक़दमा दायर किया । श्रीकृष्ण दोनों पक्षों को बुलाकर मुक़दमे का विचार करने लगे । इस प्रकार सभी ग्वालबाल क्रीड़ा में आसक्त हो गये । उधर व्योमासुर नामक कंस के गुप्तचर ने कृष्ण को मार डालने के लिए सखाओं जैसा वेश धारण कर सखा मण्डली में प्रवेश किया और भेड़ों का चोर बन गया तथा उसने भेड़ बने हुए सारे सखाओं को क्रमश: लाकर इसी कन्दरा में छिपा दिया । श्रीकृष्ण ने देखा कि हमारे सखा कहाँ गये ? उन्होंने व्योमासुर को पहचान लिया कि यह कार्य इस सखा बने दैत्य का ही है । ऐसा जानकर उन्होंने व्योमासुर को पकड़ लिया और उसे मार डाला । तत्पश्चात् पालक बने हुए सखाओं के साथ पर्वत की गुफ़ा से सखाओं का उद्धार किया ।कामवन दर्शन को आये श्रद्धालुओं ने कामवन विराजित वृंदा देवी ,गोविन्ददेव जी ,गोपीनाथ जी ,चौरासी खम्भा ,गयाकुण्ड ,श्रीकुण्ड ,कामेश्वर महादेव ,पांच पांडव ,धर्मराज जी ,चित्रगुप्त ,चरण पहाड़ी ,भोजन थाली ,भामासुर की गुफा ,दाऊजी के चरण ,कठला ,मुकुट ,खिसलनी शिला ,सेतुबंध रामेश्वर ,लंका व यशोदा ,अशोक वाटिका ,गोकुल चन्द्रमा जी ,मदनमोहन जी सहित श्री कृष्ण की लीलास्थलियों व चिन्हों के दर्शन किये।