
*_’टीम खंडेलवाल’ में पूर्व मुख्यमंत्री का दबदबा, बिदा होते हितानंद भी कर गुज़रे मन की_*
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भाजपा की बहुप्रतीक्षित प्रदेश कार्यकारिणी घोषित
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*’ मोहन-राज ‘ पर भारी ‘ शिव-राज ‘*
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_गौरव रणदिवे ने बढ़ाया इंदौर का मान, डॉ निशांत आरएसएस की पसंद बनकर उभरे_
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*_प्रदेश कार्यकरणी में जमा ‘ इन्दौरी नक्शा ‘ , इंदौर में बने हुए शिवराज गुट को मिली खासी तव्वजों_*
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_सुहास भगत की तर्ज़ पर हितानंद शर्मा ने दिखाया खूब वीटो पॉवर, ठगे से रह गए मुख्यमंत्री_
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*_विजयवर्गीय, मोघे, मालिनी से मिलने पहुचें रणदिवे, आधी रात को रणजीत दरबार मे लगाई धोक_*
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_जयपाल चावड़ा का भी हुआ राजनीतिक पुर्नवास, परमार ने सबकों चौकाया_
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राहुल सेन मांडव
मो 9669141814
*इंदौर न्यूज /_मध्यप्रदेश की भाजपाई राजनीति से राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को दूर रखने के कितने ही प्रयास कर लिए जाए, वे इस सूबे को छोड़कर कही आने जाने वाले नही। ऐसे ही ‘जगत मामा’ के नाम से लोकप्रिय मौजूदा केंद्रीय कृषि मंत्री चौहान के क़दमों को थामने की ‘ दिल्ली दरबार ‘ कितनी ही कोशिश कर ले, वे पुनः पुनः पूरे देश को छोड़ ‘ देश के दिल ‘ में लौट आएंगे। उनका राजनीतिक रणनीतिक कौशल हर बार ये साबित कर देता है कि न वे दिल्ली के ‘ मंसूबे ‘ पूरे होने देंगे, न ‘ मोहन राज’ की ‘ निष्कंटक राज ‘ की मंशा को मनोनुकलता प्रदान करने देंगे। इस बात का खुलासा भाजपा की बहुप्रतीक्षित प्रदेश कार्यकारिणी के ख़ुलासे ने कर दिया कि ‘ मामा ‘ का दबदबा मध्यप्रदेश की भाजपा की राजनीति से यू जाने वाला नही।_*
_’ मिशन 2023 ‘ को बिदा हुए 2 बरस होने को आये और इतना ही वक़्त शिवराज की राज्य की राजनीति से बेदखली का हो गया लेक़िन ‘ टीम खंडेलवाल ‘ चीख चीख कर कह रही हैं कि प्रदेश की भाजपाई राजनीति में आज भी ‘ मोहन-राज ‘ पर ‘ शिव-राज ‘ भारी हैं। प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में तो इस ‘भारीपन’ का साफ़ असर टीम खंडेलवाल की गुरुवार शाम घोषणा होते ही खुलकर सामने आ गया। ‘ शिव-राज’ के दबदबे का ख़ुलासा भी ऐसा खुल्लमखुल्ला हुआ कि भाजपा की इंदौर ही नही प्रदेश की भाजपाई राजनीति में गुरुवार रात से ही इसके चर्चें भी शुरू हो गए।_
*_भारी तो प्रदेश भाजपा के संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा भी रहें। संगठन के अहम पद से रुखसती की बेला में भी वे, वह कर गुज़रे जिसका अंदेशे था और इसी अंदेशे के फेर में ‘ टीम खंडेलवाल ‘ उजागर होने से बच रही थी। नूतन प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की मंशा थी कि प्रदेश कार्यकारिणी नूतन संगठन मुखिया की मौजूदगी में ही अस्तित्व में आये। ताकि वे मौजूदा संगठन महामंत्री के ‘ हित ‘ व ‘ आनंद ‘ से बच सके। लेक़िन ऐसा हो नही पाया और पूर्व संगठन महामंत्री सुहास भगत की तर्ज़ पर हितानंद शर्मा ने भी कार्यकारणी के पदों में खूब वीटो पॉवर दिखाया। इस वीटो पॉवर से मौजूदा मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव भी वैसे ही ठगे से रह गए, जैसे भगत के सामने तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान रह गए थे।_*
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*’ चतुर सुजान ‘ निकले ‘ मामा ‘, संघ-संगठन को भी बनाया जरिया*
_खंडेलवाल की 25 सदस्यीय प्रदेश कार्यकरणी में आधे से ज़्यादा सदस्य शर्मा ले उड़े। संघ, संगठन के बहाने इस नई प्रदेश टीम में उनके खाते में 14 सदस्य दर्ज हुए औऱ मुख्यमंत्री डॉ यादव व प्रदेश अध्यक्ष खंडेलवाल ही नही, वरिष्ठ नेता नरेंद्र सिंह तोमर तक मन मसोसकर रह गए। ज्योतिरादित्य सिंधिया को भी इक्का दुक्का समर्थकों से ही संतुष्ट होना पड़ा। ‘ मामा ‘ चतुर सुजान निकले। सबकी नज़र में न आये, लिहाज़ा कुछ समर्थकों को संगठन तो कुछ को संघ यानी आरएसएस के ज़रिए टीम खंडेलवाल में इंट्री करवा दी। लेक़िन ये सबके सब नेता शिवराजसिंह के लिए ‘ टीम इक्का तुवर ब्रांड ‘ ही हैं और उन्ही के दौर में भाजपा की सक्रिय राजनीति में न केवल इन्हें न केवल लाया गया, बल्कि स्थापित भी किया गया। डॉ निशांत खरे से लेकर जयपाल सिंह चावड़ा इसमे अहम हैं। डॉ खरे, शिवराजसिंह के एकछत्र राज में ही युवा आयोग मुखिया के ज़रिये आरएसएस से सत्ता के गलियारों में पहुचें थे। चावड़ा भी संघ की तरफ़ से सँगठन मंत्री की भूमिका से इंदौर विकास प्राधिकरण के मुखिया बनाकर राजनीति की मुख्य धारा में लाया गया और वह भी इंदौर जैसे राजनीतिक शहर में। गौरव रणदिवे में भी ‘ मामा राज ‘ में ही राजनीतिक ऊँचाई पाने का आग़ाज़ किया था।_
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*शह-मात के खेल में इंदौर का बड़ा राजनीतिक मान-सम्मान*
_*प्रदेश कार्यकारिणी की घोषणा ने प्रदेश स्तर पर भले ही क्षत्रपों में शह-मात का खेल हुआ लेक़िन इन सबके बीच इंदौर का ‘ नक्शा ‘ प्रदेश भाजपा की राजनीति में जमकर जमा। गौरव रणदिवे ने महामंत्री पद पाकर इंदौर का गौरव बड़ा दिया। वे सालों साल बाद इंदौर की राजनीति के ऐसे किरदार बनकर प्रदेश स्तर पर उभरे, जिसका कोई घोषित गॉड फादर नही था और न कोई राजनीतिक पृष्ठभूमि। रणदिवे की नियुक्ति उन नेता पुत्रो के लिए भी सबक हैं जो अपने परिवार की बरसों पुरानी राजनीतिक विरासत के बाद भी रणदिवे जैसा मुक़ाम न शहर में पा पाए, न प्रदेश स्तर पर। रणदिवे इन सबके नेता बनकर उभरे। ऐसे ही डॉ निशांत खरे भी इंदौर के हिस्से से 9 में से एक प्रदेश उपाध्यक्ष बन गए। डॉ खरे आरएसएस की पसंद बनकर भी उभरे क्योंकि वे ही संघ की तरफ़ से असली दावेदार थे और संघ ने उन पर दांव भी लगाया था। जयपालसिंह चावड़ा और भगवान सिंह परमार ने भी मोर्चा अध्यक्ष बन प्रदेश सँगठन में इंदौर का नक्शा जमाया। लेक़िन इन सबमें रणदिवे को औसत भाजपाईयों का ख़ासा समर्थन मिला और वे शहर के एक बड़े नेता बनकर उभरे। लिहाज़ा उसी बड़प्पन को आगे करते हुए वे आधी रात को ही पार्टी के वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय, कृष्णमुरारी मोघे व मालिनी गौड़ से मिलने उनके निवास पर पहुचें और उनका आशीर्वाद भी लिया। उन्होंने वीडियो सन्देश के जरिए न केवल पार्टी के शीर्ष नेतृत्व बल्कि पंडित सत्यनारायण सत्तन से लेकर बाबूसिंह रघुवंशी व सुमित्रा महाजन तक का आभार माना।*_