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पेसा कानून के सशक्त क्रियान्वयन की जमीनी मिसाल : ग्रामसभा घाटकवाली

भारत एक विविधता से भरा देश है, जहां अनेक जन-जातीय समुदाय अपनी विशिष्ट संस्कृति, बौद्ध धर्म और बौद्ध धर्म के साथ रहते हैं। इन समुदायों की आत्मनिर्भरता, सामाजिक एकता और पर्यावरण से जुड़े समुदायों की जड़ें पुरानी हैं। अत्याधुनिक परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के विस्तार के साथ-साथ कोलम की पारंपरिक शासन व्यवस्था और सामग्री पर अधिकार धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे कम होती गई। इंडोनेशिया में संसद ने वर्ष 1996 में “पंचायत (अनुसूचित क्षेत्र विस्तार) अधिनियम” में, जिसे हमने पेसा कानून (PESA अधिनियम, 1996) के नाम से जाना, जारी किया। इस कानून का मूल उद्देश्य क्षेत्र में निवासरत जनजातीय समूह को स्थानीय स्वशासन का संवैधानिक अधिकार देना था – ताकि वे अपने सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक निर्णयों को स्वयं ले सकें। पेसा अधिनियम के अनुच्छेद 243एम के अंतर्गत क्षेत्र में पंचायत व्यवस्था का विस्तार दिया गया है।

 

छत्तीसगढ़ जैसे जनजातीय बहुसंख्यक राज्य में इस कानून का महत्व और भी बढ़ता है। राज्य सरकार ने इस दिशा में 8 अगस्त 2022 को “छत्तीसगढ़ पेसा नियमों” को अधिसूचित किया, जिससे ग्राम सभाओं को अधिक स्वामित्व और अधिकार प्राप्त हुए।

 

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कलाकारों के प्रभावशाली वास्तुशिल्प की ग्राउंड पिक्चर ग्राम घाटकवली (ब्लॉक स्टिक, डिस्ट्रिक्ट स्ट्रीक्स) में देखने को मिली, जहां ग्रामवासियों ने अपने सामूहिक निर्णय, पारंपरिक न्याय प्रणाली और स्वशासन के माध्यम से यह सिद्ध कर दिया कि पेसा कानून केवल एक अधिनियम नहीं है, बल्कि आत्मनिर्भरता का आंदोलन है।

 

ग्राम घटकवाली: आत्मसम्मान और स्वशासन का केंद्र

 

दिनांक 08 अक्टूबर 2025 को पंचायती राज मंत्रालय, भारत सरकार के सचिव एवं संचालक श्री रमित मौर्य ने ग्राम घाटकवाली का दौरा किया। यह दौरा केवल एक औपचारिक निरीक्षण नहीं था, बल्कि यह यह जानने का प्रयास था कि पेसा कानून के प्रावधान वास्तव में गांव के जीवन में कैसे उतर रहे हैं।

 

ग्राम पहुंचने पर ग्रामीणों ने श्री मौर्य का पारंपरिक ढंग से हल्दी-चावल का तिलक लगाकर और पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया। वातावरण में पारंपरिक गीतों की गूंज और जनजातीय संस्कृति की झलक स्पष्ट थी। यह दृश्य न केवल स्वागत का था, बल्कि यह उस सांस्कृतिक चेतना और सामुदायिक एकता का प्रतीक भी था, जो पेसा कानून की आत्मा को प्रतिबिंबित करता है।

 

ग्राम सभा – लोकतंत्र की प्रथम इकाई

 

ग्राम घाटकवाली में ग्राम सभा केवल एक बैठक नहीं, बल्कि एक जीवंत संस्था है जो हर निर्णय का केंद्र है। यहाँ प्रत्येक माह नियमित रूप से ग्राम सभा की बैठक होती है, जिसमें सभी परिवारों की भागीदारी सुनिश्चित की जाती है।

 

ग्राम सभा ने विभिन्न विषयों के लिए स्वायत्त समितियों का गठन किया है, जिनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ग्राम स्तर की समस्याओं का समाधान ग्राम के भीतर, ग्रामवासियों के निर्णयों से ही हो।

 

ग्राम सभा की प्रमुख समितियाँ और उनकी भूमिका

 

1. शांति एवं न्याय समिति

 

इस समिति का कार्य गांव के भीतर उत्पन्न विवादों, मतभेदों या सामाजिक मुद्दों का लोकल समाधान करना है।

ग्राम के सदस्य श्री रामनाथ कश्यप बताते हैं कि ग्राम में आज भी “दंडूम व्यवस्था” प्रचलित है — जो समुदाय आधारित पारंपरिक न्याय प्रणाली है। इसमें दोषी व्यक्ति को सामाजिक दायित्व का बोध कराया जाता है, जिससे विवाद बिना बाहरी हस्तक्षेप के समाप्त हो जाते हैं।

 

यह समिति न केवल न्याय का संचालन करती है, बल्कि सामाजिक एकता और अनुशासन का भी आधार बन चुकी है। इससे पुलिस या प्रशासनिक हस्तक्षेप की आवश्यकता न्यूनतम हो जाती है।

 

2. शिक्षा समिति

 

शिक्षा समिति गांव के भविष्य की नींव है। सदस्य श्री पदमनाथ कश्यप के अनुसार, समिति प्रत्येक सप्ताह गांव के विद्यालयों और आंगनबाड़ियों का निरीक्षण करती है।

शिक्षकों की उपस्थिति, विद्यार्थियों की संख्या, पढ़ाई की गुणवत्ता और स्कूल छोड़ चुके बच्चों की पुनः वापसी पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

 

समिति के सदस्य युवाओं द्वारा श्रमदान कर कक्षा 1 से 10वीं तक के विद्यार्थियों को निःशुल्क कोचिंग देते हैं। मेधावी छात्रों को ग्राम सभा के स्तर पर पुरस्कार और प्रोत्साहन दिया जाता है।

 

इस प्रकार शिक्षा समिति ने “शिक्षा सबकी जिम्मेदारी” की अवधारणा को व्यवहारिक रूप दिया है

।3. हाटूम समिति (बाजार प्रबंधन समिति)ग्राम में प्रत्येक सप्ताह लगने वाला साप्ताहिक हाट केवल व्यापारिक गतिविधि नहीं, बल्कि सामाजिक मिलन का अवसर भी है।

हाटूम समिति इस बाजार की स्वच्छता, अनुशासन और पारदर्शिता की जिम्मेदारी संभालती है। प्रत्येक दुकानदार से स्वच्छता शुल्क की रसीद के माध्यम से वसूली की जाती है, जिससे बाजार स्थल के रखरखाव में सहायता मिलती है।

समिति ने एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए मादक पदार्थों की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया है। इससे गांव में नशामुक्ति का वातावरण बना और समाज में अनुशासन व शांति बनी हुई है।

4. प्रबंधन समिति :-यह समिति ग्राम सीमा के भीतर आने वाले प्राकृतिक संसाधनों जैसे — रेती, गिट्टी, मुरूम, पत्थर और वनोपज के उपयोग और प्रबंधन की जिम्मेदारी निभाती है।

इनसे प्राप्त राशि ग्राम सभा के सामुदायिक कोष में जमा की जाती है, जिसे गांव के विकास कार्यों जैसे — सड़क निर्माण, पेयजल व्यवस्था, सामुदायिक भवन मरम्मत आदि में उपयोग किया जाता है।

विशेष बात यह है कि भूमि का क्रय-विक्रय ग्राम सभा की अनुमति के बिना संभव नहीं है। भूमि खरीद में ग्रामवासियों को प्राथमिकता दी जाती है, जिससे बाहरी प्रभाव और असमानता को रोका जा सके।

यह समिति स्थानीय संसाधनों के न्यायपूर्ण वितरण और संरक्षण का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करती है।

5. सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन समिति (CFR Committee)

वन अधिकार कानून, 2006 के तहत वर्ष 2023 में ग्राम सभा घाटकवाली को 145 हेक्टेयर सामुदायिक वन संसाधन (CFR) अधिकार प्राप्त हुआ।

इसके बाद ग्राम सभा ने SDLC और DLC को विस्तृत वन प्रबंधन योजना भेजी। समिति ने 4 हेक्टेयर भूमि पर पौधारोपण किया और “ठेंगा पाली” प्रणाली लागू की — जिसमें प्रत्येक घर से एक सदस्य बारी-बारी से वन की सुरक्षा करता है।

इससे वन संरक्षण के साथ-साथ ग्रामवासियों में जिम्मेदारी, पर्यावरणीय चेतना और सामूहिक भागीदारी बढ़ी है। यह व्यवस्था न केवल प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में मदद करती है, बल्कि ग्रामीणों के आर्थिक सशक्तिकरण का भी माध्यम बनी है।

श्री रमित मौर्य की सराहना : “आदर्श पेसा ग्राम सभा” का दर्जा

ग्राम सभा की बैठक में भाग लेने के बाद श्री रमित मौर्य ने ग्रामवासियों की प्रशंसा करते हुए कहा —

“ग्राम घाटकवाली, पेसा कानून की भावना के अनुरूप ग्राम स्वशासन और सामुदायिक सहभागिता का सशक्त उदाहरण है। यहां की ग्राम सभा न केवल प्रशासनिक रूप से अनुशासित है, बल्कि पारंपरिक मूल्यों के साथ आधुनिक विकास की दिशा में भी अग्रसर है। इस ग्राम सभा को ‘आदर्श पेसा ग्राम सभा’ के रूप में सूचीबद्ध करने की अनुशंसा की जाएगी।”

उनकी इस टिप्पणी ने यह संकेत दिया कि घाटकवाली केवल एक गांव नहीं, बल्कि पूरे राज्य के लिए “पेसा मॉडल ग्राम” के रूप में विकसित हो सकता है।

ग्राम सभा के सुझाव : सुधार की दिशा में पहल

ग्राम सभा ने अपने अनुभवों के आधार पर पेसा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु कुछ व्यावहारिक सुझाव दिए —

1. ग्राम सभा सचिव का अधिकार ग्राम के किसी सदस्य को दिया जाए, ताकि पारदर्शिता और स्थानीय जवाबदेही बढ़े।

2. ग्राम सभा को बजट एवं कार्य एजेंसी का दर्जा दिया जाए, जिससे विकास कार्यों की स्वीकृति और क्रियान्वयन ग्राम स्तर पर संभव हो सके।

3. कोरम पूर्ति के नियमों में संशोधन किया जाए, ताकि तीसरे स्तर की बैठक में लिया गया निर्णय अंतिम माना जाए।

इन सुझावों से यह स्पष्ट है कि ग्राम सभा न केवल अपने अधिकारों का उपयोग कर रही है, बल्कि शासन प्रणाली में संरचनात्मक सुधार की दिशा में भी सक्रिय है।

पेसा कानून की आत्मा : “ग्राम सभा सर्वोच्च”

ग्राम घाटकवाली का उदाहरण इस बात का प्रमाण है कि जब जनजातीय समाज को वास्तविक अधिकार और जिम्मेदारी दी जाती है, तो वे अपने संसाधनों का संरक्षण, सामाजिक न्याय और विकास के मार्ग को स्वयं प्रशस्त कर सकते हैं।

यहाँ की ग्राम सभा केवल कागज़ी संस्था नहीं, बल्कि सजीव लोकतंत्र की इकाई है — जहाँ निर्णय, संवाद और पारदर्शिता तीनों का अद्भुत संगम है।

पेसा कानून की यही आत्मा है —“जनजातीय समाज का विकास बाहरी हस्तक्षेप से नहीं, बल्कि उनके अपने निर्णयों और परंपराओं से संभव है।”

इस अवसर पर जनपद पंचायत सीईओ श्री भानु प्रतापचुरेंद्र , जिला ऑडिटर श्री दिनेश साहू, उप संचालक श्री वीरेंद्र बहादुर, सरपंच तामेश्वरी कश्यप, ग्राम सभा अध्यक्ष महंती कश्यप, समिति सदस्य एवं सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित रहे।सभी ने सामूहिक रूप से यह संकल्प लिया कि पेसा कानून के प्रावधानों को गांव की जीवनशैली का हिस्सा बनाकर स्वावलंबी, नशामुक्त और पर्यावरण-संवेदनशील ग्राम का निर्माण किया जाएगा।

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