


धन्य हैं वो लोग जो कामवन ब्रजभूमि में निवास करते हैं- गोस्वामी द्वारकेश लाल
रिपोर्टर मनमोहन गुप्ता कामां डीग 9783029649
कामां – भड़ूच सूरत क़े बल्लभाचार्य संप्रदाय के गोस्वामी द्वारकेश लाल व गिरधरराय क़े साथ आये गोस्वामीओं व बहुजीओं ने विमल बिहारी मन्दिर क़े दर्शन व पूजन कर मन्दिर सेवायत विक्रम लवानिया से माहात्म्य श्रवण किया। लवानिया ने बताया कि इस भूमि का कण-कण राधा-कृष्ण की पावन लीलाओं का साक्षी है। यही कारण है कि समूचे ब्रज मण्डल का दर्शन व उसकी पूजा करने के उद्देश्य से देश-विदेश से असंख्य तीर्थ यात्री यहां वर्ष भर आते रहते हैं।
जिस आनन्द की अनुभूति कामवन में मिलती है अन्यत्र कहीं नहीं मिलती । यहां श्रीकृष्ण की सजीव व जीवन्त लीलाओं के चिन्ह हैं जो आनन्ददायक व भक्ति से परिपूर्ण हैं ।कामवन में चारों धाम विराजित हैं। धन्य हैं वो लोग जो कामवन ब्रजभूमि में निवास करते हैं । तीर्थराज विमलकुण्ड करोड़ों लोगों की आस्था का केन्द्र व कामवन धाम का हृदय माना जाता है। 5500 वर्ष पूर्व इसका प्राकट्य विमल कन्याओं के प्रेमाश्रुओ से हुआ। अनेकों पुराण इसकी गाथाओं से भरे पड़े हैं। विष्णु पुराण ,पद्म पुराण ,नारद पुराण ,आदिवाराह पुराण ,ब्रह्मवैवर्त पुराण ,महाभारत ,गर्ग संहिता आदि में इसका विस्तार से माहात्म्य वर्णित है।
हजारों वैष्णवों की पदयात्रा जो कामवन क़े छिछरबाडी रोड पर तीन दिन से प्रवास कर रही थी आज प्रातः बरसाना को प्रस्थान कर गयी। ।
सभी वैष्णवों ने कामवन विराजित तीर्थराज विमलकुण्ड ,मुख्य मन्दिर विमल बिहारी सहित श्रीकृष्ण की क्रीड़ास्थलियों गया कुण्ड ,चरण पहाड़ी ,भोजन थाली ,खिसलनी शिला ,भामासुर की गुफा ,महाप्रभु जी की बैठक ,श्रीकुण्ड ,सेतुबन्ध रामेश्वर ,लंका-यशोदा,गया कुण्ड ,कामेश्वर महादेव ,पंचमुखी महादेव,पांच पांडव , वृन्दादेवी ,गोविन्ददेव जी ,गोपीनाथजी ,चौरासीखम्भा ,
गोकुल चन्द्रमा ज़ी ,मदनमोहन ज़ी आदि के दर्शन किये।
गोकुल चन्द्रमा जी हवेली में विशाल 56 भोग का आयोजन हुआ जिसके दर्शनार्थ लाखों भक्तजन कामवन आये ॥