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“मैं हिंदी हूं मैं हिंदी हूं भारत के भाल की बिंदी हूं “-शीशराम गोला

“मैं हिंदी हूं मैं हिंदी हूं भारत के भाल की बिंदी हूं “-शीशराम गोला

रिपोर्टर मनमोहन गुप्ता कामां 9783029649

कामां: स्वतंत्र लेखक संघ इकाई के तत्वावधान में हिंदी दिवस पर साहित्य गौरव विषयक सरस काव्य गोष्ठी का आयोजन श्री राधा कृष्ण माध्यमिक विद्यालय सभागार में किया गया। इकाई अध्यक्ष युवा कवि विक्रम विद्रोही ने बताया कि गोष्टी की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि नानक चंद नवीन कैथवाड़ा ने की। गोष्ठी में भरतपुर रूपवास और अलवर से पधारे नवोदित कवि एवं शायरों ने हिंदी दिवस की सार्थकता सिद्ध करते हुए अपनी सरस काव्य रचनाओं से मंत्र मुग्ध कर दिया। भरतपुर के कवि विकास शास्त्री ने “तजुर्बा उम्र से नहीं किंतु मेहनत से होता है” पंक्तियों के माध्यम से श्रमशीलता पर बल दिया तो स्थानीय कवि पंकज प्रखर ने “सूर रसखान तुलसी कबीर मीराबाई भारतेंदु बच्चन निराला दिए हिंदी ने” छंद पढ़ कर वाह वाही लूटी। अलवर के युवा कवि अजय ने “सरफरोशी की तमन्ना फिर से कर रहा हूं मेरा कच्चा मकान है बरसात से डर रहा हूं “शायरी के माध्यम से हृदय के उदगार व्यक्त किये। विकास सिकरवार रूपवास ने “मैंभारत मां का बेटा हूं हिंदुस्तान बचाने आया हूं”देशभक्ति पूर्ण रचना सुनाई तो सुरेंद्र शायर ने खुद की बनाई इश्क की दुनिया उजाड़कर कब से मैं बैठा हूं ये पागल दिल निकाल कर”शेर के माध्यम से तालियां बटोरी। स्थानीय कवि शीशराम गोला ने “मैं हिंदी हूं मैं हिंदी हूं भारत के भाल की बिंदी हूं “गीत प्रस्तुत कर मातृभाषा हिंदी के प्रति सम्मान व्यक्त किया तो युवा कवि हेमेंद्र मनु ने “मैं जलता हुआ चिराग हूं दिनकर की परिभाषा का”रचना पढी। नवोदित शायर कुनाल शर्मा ने “वो बोले कैसे लिख लेते हो इतना अच्छा मैं बोला कि मैं तन्हा हूं”रचना सुनाकर प्रशंसा पाई वहीं नितिन अलवर ने “देख अंगूठी लाया हूं हाथ में मगर पहले वह निकाल जो तेरे हाथ में है”सुना कर प्रेम प्यार की रसधार बहाई। पत्रकार मायाशंकर साहू ने “दो भोले वरदान हिंदी का उजाला फैले घर-घर में” नामक पंक्तियों से अपने विचार व्यक्त किए। स्थानीय श्रृंगार कवि पवन कुमार नीरज ने “वतन की आन है हिंदी वतन की शान है हिंदी” सरस मुक्तक सुनाकर सराबोर किया तो सुभाष प्रजापति ने “हिंदी से झलकते हैं यार सारे संस्कार हिंदी ही तो जग में पहचान दिलाती है “नामक रचना पढ़ शाबाशी पाई। दीपेंद्र राठौड़ रूपवास ने “भारत माता का वंशज हूं इतिहास रचाने आया हूं “वीर रस से ओत प्रोत रचना पढी तो स्थानीय कवि गोविंद बृजवासी ने “हिंदी भाषा है हमारी पहचान सबन कूं भैया है प्यारी”सरस गीत पढ़कर तालियां बटोरी। कवि विवेक शर्मा ने “हे गिरधारी हे बनवारी लाज रखो हे कृष्णमुरारी भक्तिमयी रचना प्रस्तुत की। विक्रम विद्रोही युवा हस्ताक्षर ने “मत औरत तुम श्रृंगार लिखो तुम कड़वा सच प्रहार लिखो”रचना सुनाकर नारी सशक्तिकरण का संदेश दिया। गोष्ठी का शानदार संचालन करते हुए युवा कवि गौरव शर्मा ने ” उसने शादी भी की थी बड़े इंतजार से, कहती थी देखना होगी शादी किसी राजकुमार से”व्यंगात्मक पंक्तियों से सामाजिक विसंगतियों पर तंज कसा।
आयोजक विक्रम विद्रोही ने मत औरत तुम श्रंगार लिखो, तुम कडवा सच प्रहार लिखो करके रचना सुनाई। बृजेश तिवारी ने सभी कवियों की काव्य रचना को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से जनता जनार्दन को दिखाया
अंत में कार्यक्रम के अध्यक्ष नानक चंद नवीन ने अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए नवोदित कवियों को निरंतर स्वाध्याय कर अपने वरिष्ठ गुरुजनों का मार्गदर्शन लेकर काव्य जगत में आगे बढ़ने की प्रेरणा प्रदान की साथ ही हिंदी भाषा के उत्थान हेतु “एक नई परिभाषा ढूंढो हिंदी जैसी भाषा ढूंढो” पंक्तियों से युवाओं का मार्गदर्शन किया। विद्यालय के प्रधानाचार्य डालचंद शर्मा ने हिंदी दिवस के पावन अवसर पर आयोजित काव्य गोष्ठी में पधारे समस्त कवियों एवं सुधी श्रोताओं का आभार व्यक्त किया।

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