

रिपोर्टर मनमोहन गुप्ता कामां 9783029649
डीग जिले के कामां कामवन धाम में श्रावण मास में ब्रज 84 कोस पदयात्रियों का तीर्थराज विमलकुण्ड पर आगमन शुरू हो जाता है। हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं का यहां जमावड़ा होता है। तीर्थराज में स्नान आचमन व दर्शन कर सभी यहां अपना भोजन तैयार करते हैं। परन्तु स्थान का अभाव व गन्दगी क़े कारण भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है भक्तों की परेशानी को देखते हुए नगरपालिका क़े ईओ साहब को दिनांक 14 जुलाई 2025 को इस स्थान क़े रख रखाव का ज्ञापन दिया था परन्तु अभी तक तो कोई कार्यवाही अमल में नहीं लाई गयी। यदि इस स्थान पर इंटरलाकिंग करा दी जावे तो सुविधाजनक हो सकता है।
तीर्थराज विमलकुण्ड का वह स्थान जहां ब्रज 84 कोस यात्रा कर रहे यात्री भोजन आदि तैयार करते हैं वह स्थान झारवीर मन्दिर क़े ठीक सामने तथा फायर स्टेशन क़े पास है।
तीर्थराज का पौराणिक माहात्म्य विमल बिहारी क़े सेवाअधिकारी संजय लवानिया ने बताया कि चातुर्मास में समस्त तीर्थ कामवन में ही निवास करते हैं जिसके कारण इन दिनों श्रद्धालुओं का कामवन में सैलाब आता है तथा मान्यतानुसार भगवान श्रीकृष्ण ने मैया यशोदा और नंदबाबा के दर्शनों के लिए सभी तीर्थों को आदि वृंदावन कामवन में ही बुला लिया था। 84 कोस की परिक्रमा 84 लाख योनियों से छुटकारा पाने के लिए है। परिक्रमा लगाने से एक एक कदम पर जन्म जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं। शास्त्रों में यह भी कहा गया है कि इस परिक्रमा के करने वालों को एक एक कदम पर अश्वमेध यज्ञ का फल मिलता है। साथ ही जो व्यक्ति इस परिक्रमा को लगाता है, उस व्यक्ति को निश्चित ही मोक्ष की प्राप्ति होती है।