हमीरपुर से ब्यूरो चीफ राजकुमार की रिपोर्ट
मौदहा हमीरपुर।रमज़ान-उल-मुबारक (Ramadan) इस्लामी कैलेंडर का पवित्र नौवां महीना है, जिसे ‘नेकियों का मौसम’ या इबादत का सुनहरा अवसर माना जाता है। इसमें रोजा (उपवास), तरावीह की नमाज, कुरान की तिलावत और दान (सदाकत-उल-फितर) के जरिए खुदा की रहमत और बरकतें हासिल की जाती हैं। यह आत्म-अनुशासन, सब्र और रूहानी सफाई का समय है।
नेकियों में बढ़ोतरी: इस महीने में हर छोटी-बड़ी नेकी का सवाब (पुण्य) कई गुना बढ़ जाता है।
फर्जी आरसी बनाकर स्कूटी बेचने का मामला, बाइक प्वाइंट के दो संचालकों पर प्राथमिकी दर्ज ।वाहनों की खरीद-बिक्री करने वाले शेख शाहंशाह (पिता–स्व. शेख इलियास, निवासी राजवाड़ी रोड, कतरास) तथा मो. आगाज अंसारी (पिता–नौशाद अंसारी, निवासी छाताबांध, कतरास) ने वाहन खरीदार को उक्त फर्जी आरसी को मूल दस्तावेज बताकर उपलब्ध कराया था।कतरास। वरीय पुलिस अधीक्षक, धनबाद के निर्देश पर थाना प्रभारी प्रवीण कुमार के नेतृत्व में गुहिबांध बस स्टैंड के समीप वाहन जांच अभियान चलाया गया। जांच के दौरान स्कूटी संख्या JH10DC6884 के दस्तावेजों की जांच में आरसी (RC) की इलेक्ट्रॉनिक कॉपी में छेड़छाड़ किए जाने का मामला सामने आया।पुलिस के अनुसार, आरसी कार्ड में वाहन स्वामी के नाम में बदलाव कर फर्जी आरसी तैयार की गई थी और उसी के आधार पर स्कूटी को दूसरे व्यक्ति को बेच दिया गया था। पूछताछ में पता चला कि छाताबाद पुल के पास ‘बाइक प्वाइंट’ नाम से सेकेंड हैंड वाहनों की खरीद-बिक्री करने वाले शेख शाहंशाह (पिता–स्व. शेख इलियास, निवासी राजवाड़ी रोड, कतरास) तथा मो. आगाज अंसारी (पिता–नौशाद अंसारी, निवासी छाताबाद, कतरास) ने वाहन खरीदार को उक्त फर्जी आरसी को मूल दस्तावेज बताकर उपलब्ध कराया था। जांच में यह भी सामने आया कि जब्त की गई स्कूटी भी इन्हीं दोनों द्वारा बेची गई थी।इस मामले में कतरास थाना में कांड संख्या 172/26, दिनांक 30 जून 2026 के तहत दोनों आरोपियों के विरुद्ध संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है।
30/06/2026
लाइलतुल-कद्र (शब-ए-कद्र): रमज़ान की आखिरी 10 रातों में से किसी एक ताक रात (Odd Night) में ‘लाइलतुल-कद्र’ होती है, जो ‘हजार महीनों से बेहतर’ है।
कुरान का महीना: इसी महीने में कुरान शरीफ नाजिल हुआ था, इसलिए इसका पाठ विशेष रूप से किया जाता है।
दान और फितरा: गरीबों की मदद करना और ‘फितरा’ देना जरूरी है, जो रमज़ान की खुशी में उन्हें शामिल करता है।
तरावीह: इशा की नमाज के बाद विशेष नमाज, तरावीह, पढ़ी जाती है जिसमें पूरा कुरान सुनाया जाता है।
रोजा और इफ्तार: भूखे-प्यासे रहकर रोजा रखने से संयम आता है, और ‘इफ्तार’ (रोजा खोलना) के समय की दुआएं बहुत कीमती होती हैं।
यह पवित्र महीना आत्म-सुधार और अल्लाह के करीब आने का सबसे बड़ा मौका है।
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