
*मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने की पहल, ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित*
संवाददाता धनंजय जोशी
जिला पांढुरना मध्य प्रदेश

ग्रामीण आदिवासी समाज विकास संस्थान द्वारा संचालित ‘नलम सामुदायिक मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम’ के माध्यम से पांढुर्णा विकासखंड में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने और सामाजिक भ्रांतियों को जड़ से मिटाने के निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में ग्राम सिवनी एवं ग्राम पारडी में जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य मानसिक रोगों को लेकर समाज में व्याप्त डर और संकोच को दूर करना तथा उपचार की सुलभता सुनिश्चित करना रहा।

कार्यक्रम के दौरान नलम कार्यकर्ताओं ने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि मानसिक स्वास्थ्य अब उपेक्षा का विषय नहीं है, बल्कि यह शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्वपूर्ण है। जिला प्रशासन एवं रेडक्रॉस सोसाइटी के सहयोग से संचालित इन प्रयासों की जानकारी देते हुए कार्यकर्ताओं ने बताया कि सही समय पर विशेषज्ञ की सलाह और उचित देखभाल से मानसिक समस्याओं का पूर्णतः समाधान संभव है। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि जानकारी के अभाव में लोग मानसिक रोगों को दैवीय प्रकोप या अन्य भ्रांतियों से जोड़ देते हैं, जबकि यह एक चिकित्सकीय स्थिति है जिसका सफल इलाज उपलब्ध है।

संस्था द्वारा क्षेत्र में दी जा रही नि:शुल्क सेवाओं की विस्तार से जानकारी भी दी गई। बताया गया कि विकासखंड के विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रतिमाह विशेषज्ञों द्वारा उपचार प्रदान किया जाता है। ग्रामीणों की सुविधा के लिए निर्धारित समय सारिणी के अनुसार प्रत्येक माह के प्रथम शनिवार को उपस्वास्थ्य केंद्र कौड़िया, द्वितीय शनिवार को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सिवनी, तृतीय शनिवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नांदनवाडी तथा चतुर्थ शनिवार को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तिगांव में मनोचिकित्सक उपस्थित रहकर मरीजों की जांच करते हैं और उन्हें नि:शुल्क परामर्श एवं दवाइयां उपलब्ध कराई जाती हैं।
जागरूकता कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं ने ग्रामीणों से धैर्य बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि मानसिक रोगों का उपचार लंबा चल सकता है, इसलिए चिकित्सक के परामर्श का नियमित पालन करना और दवाइयों का सेवन बीच में न छोड़ना अत्यंत आवश्यक है। साथ ही समाज से मानसिक रोगियों के प्रति सकारात्मक एवं सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया गया, ताकि मरीज शीघ्र स्वस्थ होकर मुख्यधारा में लौट सकें।
कार्यक्रम के अंत में नलम टीम ने ग्रामीणों से अपील की कि वे अपने आसपास मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्तियों को चिन्हित करने में सहयोग करें, ताकि कोई भी व्यक्ति उपचार से वंचित न रहे।