
बिहार के लाखों शिक्षकों की आवाज, संघर्ष और सम्मान का प्रतीक थे शिक्षक नेता
बड़ी संख्या में शिक्षक, सामाजिक कार्यकर्ता और जनप्रतिनिधियों ने पुष्पांजलि अर्पित कर दी अंतिम विदाई
संवाददाता। रणजीत कुमार। जहानाबाद। जिले के मानियामा गांव निवासी वरिष्ठ शिक्षक नेता एवं बिहार राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष ब्रजनंदन शर्मा का 106 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन की खबर मिलते ही जिले सहित पूरे राज्य में शोक की लहर दौड़ गई। जैसे ही यह सूचना गांव और शहरों तक पहुंची, हर ओर मातम छा गया और लोग उनके अंतिम दर्शन के लिए उनके पैतृक गांव की ओर उमड़ पड़े। ब्रजनंदन शर्मा का पार्थिव शरीर सुबह उनके पैतृक गांव मानियामा लाया गया, जहां ग्रामीणों ने भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद पार्थिव शरीर को जहानाबाद शिक्षक संघ कार्यालय लाया गया, जहां बड़ी संख्या में शिक्षक, सामाजिक कार्यकर्ता और जनप्रतिनिधियों ने पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें अंतिम विदाई दी। आज पूरा जहानाबाद शोक और संवेदना के वातावरण में डूबा नजर आया।
करीब 70 वर्षों तक बिहार शिक्षक संघ का नेतृत्व करने वाले ब्रजनंदन शर्मा केवल एक संगठन के अध्यक्ष नहीं थे, बल्कि वे बिहार के लाखों शिक्षकों की आवाज, संघर्ष और सम्मान का प्रतीक थे। उन्होंने ऐसे दौर में शिक्षक आंदोलन को मजबूती दी, जब शिक्षकों की सामाजिक प्रतिष्ठा और आर्थिक सुरक्षा गंभीर चुनौतियों से जूझ रही थी। केंद्रीय वेतनमान, शिक्षक अधिकारों और सम्मानजनक जीवन की लड़ाई में उनकी भूमिका ऐतिहासिक रही। उनकी संगठनात्मक क्षमता का आलम यह था कि उनके एक आह्वान पर ही शिक्षक आंदोलन “करो या मरो” की तर्ज पर खड़ा हो जाता था और सरकार को वार्ता के लिए विवश होना पड़ता था।
उनके निधन की खबर फैलते ही राज्यभर के शिक्षकों, शिक्षा संगठनों और शुभचिंतकों में गहरा शोक व्याप्त हो गया। जिले के कई स्थानों पर शोक सभाओं का आयोजन कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। ब्रजनंदन शर्मा के पुत्र पूर्व सांसद अरुण कुमार और पूर्व मंत्री अनिल कुमार ने अपने पिता को याद करते हुए कहा कि उनकी कर्मठता, अनुशासन और संघर्षशील नेतृत्व के कारण ही वे पिछले सात दशकों तक शिक्षक संघ के अध्यक्ष बने रहे। परिवार में उनके पुत्रों के अलावा अतरी विधायक और घोसी विधायक ऋतुराज जैसे पोते भी शामिल हैं। ब्रजनंदन शर्मा का निधन न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे शिक्षक समाज और बिहार के सामाजिक- शैक्षणिक आंदोलन के लिए अपूरणीय क्षति है। उनका जीवन संघर्ष, समर्पण और सिद्धांतों की अमिट मिसाल बनकर सदैव याद रहेगा।