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मुंबई में दूर्गा मन्दिर में चल रही श्रीराम कथा के प्रथम दिवस पर भक्ति और श्रद्धा का हुआ अद्भुत संगम

अखंड भारत न्यूज़ कौंशाम्बी

मुंबई में दूर्गा मन्दिर चल रहे श्री राम कथा के प्रथम दिवस पर भक्ति और श्रद्धा का हुआ अद्भुत संगम

कथा सुनते हुए

संवाददाता: प्रभाकर मिश्र 

मुंबई। भक्ति और आस्था का अनूठा संगम देखने को मिला जब मुंबई के दुर्गा मंदिर पटेल रोड गोरेगांव में चल रही श्रीराम कथा के प्रथम दिवस का शुभारंभ बड़े ही धार्मिक और उत्साहपूर्ण माहौल में किया गया। कथा का वाचन जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी डॉ. उमाकान्तानन्द सरस्वती महाराज ने अपने ओजस्वी और मधुर वचनों से किया।

महामंडलेश्वर स्वामी डॉ. उमाकान्तानन्द सरस्वती महाराज ने कथा के प्रथम दिवस में भगवान श्रीराम के जन्म प्रसंग से कथा की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि श्रीराम केवल एक राजा नहीं, बल्कि धर्म, सत्य, मर्यादा और आदर्श जीवन के प्रतीक हैं। उनके जीवन से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हर परिस्थिति में धर्म के मार्ग पर चलते हुए दूसरों के कल्याण की भावना रखनी चाहिए।

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महाराज श्री ने कहा कि भगवान श्रीराम ने न केवल परिवार और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया बल्कि सम्पूर्ण मानवता के लिए उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने वर्तमान समाज को संदेश देते हुए कहा कि आज भी यदि हम श्रीराम के आदर्शों का अनुसरण करें तो समाज में प्रेम, एकता और शांति स्थापित हो सकती है।

इस पावन कथा के मुख्य यजमान नेम चंद्र जैन, राधेश्याम मिश्र शशी उपाध्याय ,विजय शुक्ला, ने विधिवत पूजा-अर्चना कर कथा का शुभारंभ कराया। कथा प्रारंभ होने से पूर्व वेद मंत्रों की ध्वनि और भजन कीर्तन से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।

कथा स्थल को सुंदर फूलों और रोशनी से सजाया गया था। श्रद्धालु बड़ी संख्या में कथा स्थल पर पहुंचे और महाराज श्री के प्रवचनों को सुनकर भावविभोर हो उठे। कई भक्तों की आंखें कथा के प्रसंग सुनकर नम हो गईं।

कार्यक्रम के अंत में श्रीराम आरती का आयोजन किया गया, जिसमें उपस्थित भक्तों ने दीप जलाकर भगवान श्रीराम की आरती उतारी। इसके बाद प्रसाद वितरण हुआ। आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि कथा का सिलसिला अगले सात दिनों तक चलेगा, जिसमें प्रतिदिन अलग-अलग प्रसंगों पर महाराज श्री प्रवचन देंगे।

भक्तों ने बताया कि स्वामी डॉ. उमाकान्तानन्द सरस्वती महाराज का कथा वाचन अत्यंत प्रेरणादायक और भावनाओं से परिपूर्ण है, जिससे प्रत्येक श्रोता को आध्यात्मिक शांति और ऊर्जा का अनुभव होता है।

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