4 फीट की दुकान के आगे 8 फीट तक कब्जा, गांधी चौराहा बना डेंजर जोन; दीपावली से पहले यातायात और पार्किंग की ठोस व्यवस्था बनाने की जरूरत… स्कूली वाहनों से लेकर एंबुलेंस तक को निकलने में करनी पड़ती है मशक्कत, बस स्टैंड पर यात्रियों की सुरक्षा भी दांव पर
रिपोर्टर दिलीप कुमरावत MobNo 9179977597
मनावर। जिला धार।। नगर में बढ़ता अतिक्रमण अब आम नागरिकों के लिए परेशानी का सबब बन गया है। नगर के मुख्य मार्ग धार रोड, इंदौर रोड और सिंघाना रोड से लेकर गांधी चौराहे तथा बस स्टैंड तक अव्यवस्थित यातायात और अतिक्रमण के कारण आवागमन प्रभावित हो रहा है। स्थिति यह है कि 4 फीट की दुकान के आगे 8 फीट तक अतिक्रमण दिखाई देता है। सड़कों और फुटपाथों पर फुटकर दुकानें लगने से राहगीरों के लिए निकलने तक की जगह नहीं बचती। नगर में व्यवस्थित पार्किंग की व्यवस्था नहीं होने से सड़कें ही वाहनों की पार्किंग का स्थान बन गई हैं। ऐसे में स्कूली वाहनों, एंबुलेंस, अग्निशमन वाहनों और अन्य आपातकालीन सेवाओं के वाहनों को भी रास्ता निकालने में भारी मशक्कत करनी पड़ती है।
*गांधी चौराहे से बस स्टैंड तक यातायात व्यवस्था चरमराई*
नगर का गांधी चौराहा दिनभर वाहनों और लोगों की आवाजाही से व्यस्त रहता है। यहां सड़क किनारे दुकानों, हाथ ठेलों और बेतरतीब खड़े वाहनों के कारण यातायात बाधित होता है। यही स्थिति धार रोड, इंदौर रोड और सिंघाना रोड पर भी देखने को मिलती है। अतिक्रमण के कारण सड़क की उपयोगी चौड़ाई कम हो रही है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ रहा है। आवारा पशुओं का जमघट भी यातायात में बाधा बनता है। इसके बावजूद यातायात व्यवस्था को व्यवस्थित करने के लिए कोई प्रभावी और स्थायी योजना दिखाई नहीं देती।
*बस स्टैंड पर यात्रियों की परेशानी, सुरक्षा पर भी सवाल*
नगर के बस स्टैंड पर हाथ ठेला गाड़ियों का जमावड़ा लगा रहने से बसों के आने-जाने और यात्रियों के चढ़ने-उतरने में परेशानी होती है। यात्री प्रतीक्षालय के आसपास भी अतिक्रमण फैला हुआ है। इससे यात्रियों को प्रतीक्षालय तक पहुंचने में कठिनाई होती है। बस स्टैंड के प्रवेश द्वार तक अतिक्रमण की चपेट में हैं, जिसके कारण बसों और अन्य वाहनों की आवाजाही प्रभावित होती है। ऐसे में यात्रियों को दुर्घटना का खतरा बना रहता है। सार्वजनिक परिवहन के प्रमुख केंद्र पर इस तरह की अव्यवस्था यात्रियों की सुरक्षा के लिहाज से गंभीर चिंता का विषय है।
*ग्रामीण अंचल का प्रमुख व्यापारिक केंद्र, फिर भी पार्किंग नदारद*
मनावर और गंधवानी तहसीलों के ग्रामीण अंचलों के रहवासियों के लिए नगर व्यापार, कृषि और शिक्षा का प्रमुख केंद्र है। आदिवासी एवं ग्रामीण बहुल क्षेत्र होने के कारण आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग खरीदारी, कृषि कार्यों और अन्य आवश्यकताओं के लिए नगर पहुंचते हैं। नगर से बड़े शहरों, महानगरों और अंतरप्रांतीय शहरों के लिए यात्री बसों का संचालन होता है। प्रतिदिन सैकड़ों बसों की आवाजाही के साथ नगर के समीप स्थित अल्ट्राटेक सीमेंट कंपनी के कारण भारी ट्रक और ट्राले भी यहां से गुजरते हैं। इसके बावजूद नगर में व्यवस्थित पार्किंग, फुटकर दुकानदारों के लिए निर्धारित स्थान और सुचारु यातायात प्रबंधन का अभाव परेशानी बढ़ा रहा है।
*दीपावली से पहले बढ़ेगी भीड़, अभी से व्यवस्था बनाने की जरूरत*
दीपावली का त्योहार नजदीक आने के साथ ही हाट बाजार में खरीदारों की भीड़ बढ़ने लगी है। त्योहार के दौरान बाजारों में फुटकर दुकानों और हाथ ठेलों की संख्या में भी तेजी से बढ़ोतरी होने की संभावना है। यदि समय रहते उचित व्यवस्था नहीं की गई तो मुख्य मार्गों, चौराहों और बाजारों में जाम की स्थिति और गंभीर हो सकती है। इससे आम नागरिकों, महिलाओं, बुजुर्गों, बच्चों और ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
*औपचारिक कार्रवाई नहीं, स्थायी समाधान की दरकार*
नगर में अतिक्रमण और यातायात की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। व्यवस्था सुधारने के लिए की जाने वाली कार्रवाई यदि केवल औपचारिकता तक सीमित रहती है, तो समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है। जरूरत इस बात की है कि नगर पालिका, प्रशासन और यातायात व्यवस्था से जुड़े विभाग संयुक्त रूप से ठोस कार्ययोजना बनाएं। मुख्य मार्गों और चौराहों को अतिक्रमण मुक्त करने के साथ फुटकर दुकानदारों के लिए निर्धारित स्थान तय किए जाएं। बस स्टैंड के प्रवेश द्वार और यात्री प्रतीक्षालय के आसपास से अतिक्रमण हटाकर बसों के आवागमन तथा यात्रियों के चढ़ने-उतरने के लिए पर्याप्त जगह सुनिश्चित की जाए।
साथ ही नगर में पार्किंग स्थल चिह्नित किए जाएं और गांधी चौराहे सहित प्रमुख मार्गों पर यातायात नियंत्रण की प्रभावी व्यवस्था लागू की जाए। जनप्रतिनिधियों और सामाजिक-राजनीतिक संगठनों को भी जनहित के इस मुद्दे पर सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
अब सवाल यह है कि दीपावली की भीड़ बढ़ने से पहले प्रशासन यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए ठोस कदम उठाएगा या फिर हर साल की तरह नागरिकों को जाम, अतिक्रमण और अव्यवस्था के बीच ही आवागमन करने को मजबूर होना पड़ेगा?
